करनाल में पुराने बस अड्डे के बंद गेट के कारण तीन प्रमुख मार्गों पर जाम, लोगों को हुई भारी परेशानी

करनाल में पुराने बस अड्डे के बंद गेट के कारण तीन प्रमुख मार्गों पर जाम, लोगों को हुई भारी परेशानी
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नकली रास्ते और यातायात की समस्या: करनाल में बस अड्डे पर जाम का मुद्दा

करनाल: शहर के पुराने बस अड्डे के पीछे वाले गेट को मरम्मत कार्य के लिए बंद कर दिए जाने के बाद, पूरे शहर में यातायात की समस्या उत्पन्न हो गई है। यह बंद गेट की वजह से कैथल, काछवा और असंध से आने वाली बसों को अब बस अड्डे के मुख्य द्वार से ही प्रवेश और निकासी करनी पड़ रही है, जिससे बस अड्डा रोड पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। नतीजतन, न केवल बस अड्डा मार्ग बल्कि इससे जुड़े तीन अन्य सड़क मार्गों पर भी जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे यात्रियों और वाहन चालकों को घंटों तक समस्याओं का सामना करना पड़ा।

बस अड्डे के गेट बंद होने से बढ़ा दबाव

पुराने बस अड्डे के पिछला गेट बंद होने के कारण बसों के आने-जाने के लिए अब सिर्फ एक ही रास्ता उपलब्ध हो गया है, जिससे वहाँ से गुजरने वाली सभी गाड़ियाँ एक ही जगह से प्रवेश और निकासी कर रही हैं। इसके परिणामस्वरूप, बस अड्डा रोड पर वाहनों का अत्यधिक दबाव बढ़ गया, और जाम की स्थिति लगभग पूरे दिन बनी रही। जाम के कारण यात्री घंटों तक अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच सके।

इस समस्या से परेशान लोग, जो अक्सर पांच मिनट में अपनी मंजिल तक पहुँच जाते थे, आज उस रास्ते पर आधे घंटे तक इंतजार करते रहे। वहीं, कई यात्रियों को अपने रास्ते में आगे बढ़ने के लिए ई-रिक्शा, ऑटो और बसों से उतरकर पैदल सफर करना पड़ा। यह स्थिति दिनभर बनी रही, और आम लोग इसके कारण परेशान रहे।

यात्री पहुंचे पैदल, जाम के कारण बसों से उतरना पड़ा

जाम की स्थिति इतनी गंभीर थी कि कई यात्रियों को मजबूरी में बस से उतरकर पैदल ही अपने गंतव्य तक जाना पड़ा। कुरुक्षेत्र से आए यात्री नवीन, नीलोखेड़ी के अंकुर, आंचल और तरावड़ी की बबीता ने बताया कि करीब 20 मिनट तक उनकी बस जाम में फंसी रही। वे सभी आंबेडकर चौक के पास बस से उतरने के बाद पैदल बस अड्डे तक पहुंचे। यह सिर्फ उनके साथ नहीं हुआ, बल्कि बहुत से अन्य यात्रियों ने भी इसी तरह पैदल चलने का विकल्प अपनाया।

यात्रियों ने यह भी बताया कि वे बहुत अधिक परेशान थे, क्योंकि जाम में फंसने के बाद उन्हें अपने सामान को भी हाथ में उठाना पड़ा, और छोटे बच्चों को गोद में लेकर उन्हें पैदल यात्रा करनी पड़ी। उनके लिए यह बहुत ही कठिन और थका देने वाला अनुभव था।

रोडवेज बसों का रूट भी बदला गया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली

रोडवेज प्रशासन की ओर से भी इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। पुराने बस अड्डे से निकलने वाली करीब 70 रोडवेज बसों के रूट में बदलाव किया गया है। अब ये बसें मुख्य द्वार से ही प्रवेश और निकासी करती हैं, लेकिन इस कदम का भी कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। बसों का रूट बदलने के बावजूद जाम की समस्या कम नहीं हो पाई, और लोग परेशानी का सामना करते रहे।

आंबेडकर चौक से बस अड्डे तक रेंगते वाहन

जाम की समस्या सिर्फ बस अड्डे तक ही सीमित नहीं रही। आंबेडकर चौक से लेकर पुराने बस स्टैंड तक वाहन रेंगते हुए चलते रहे। यात्री अपनी-अपनी मंजिलों तक पहुंचने के लिए घंटों इंतजार करते रहे, और रास्ते में गाड़ी खड़ी होने के कारण न तो वे आगे बढ़ पाए और न ही किसी और को पीछे जाने का मौका मिला।

इस दौरान, बस यात्री अपनी पूरी यात्रा के दौरान परेशान रहे। छोटे बच्चों और भारी सामान के साथ यात्रा कर रहे लोग जाम के कारण बेहद परेशान नजर आए। वहीं, पुराने बस स्टैंड से भगवान वाल्मीकि चौक तक भी जाम का यही आलम रहा।

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जनता ने सरकार से राहत की मांग की

समय की इस कठिनाई को देखते हुए स्थानीय जनता ने प्रशासन से राहत की मांग की है। जाम की स्थिति से निजात दिलाने के लिए अधिकारियों से अपील की गई है कि वे जल्दी ही बस अड्डे के पीछे वाले गेट को खोलें और यातायात की समस्या का समाधान करें।

इसके अलावा, यात्री और स्थानीय लोग उम्मीद करते हैं कि प्रशासन इस मार्ग पर ट्रैफिक पुलिस के साथ-साथ अन्य उपायों को भी लागू करेगा, ताकि लोगों को भविष्य में इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

निष्कर्ष

करनाल में बस अड्डे के बंद गेट के कारण उत्पन्न हुई जाम की समस्या ने यातायात व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि बिना सोचे-समझे बदलाव और मरम्मत कार्यों के दौरान यातायात के दबाव का सही तरीके से प्रबंधन किया जाना चाहिए। यदि प्रशासन जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं करता, तो आने वाले दिनों में शहरवासियों को और भी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए यह अनुभव एक अलर्ट है कि प्रशासन को यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसे जाम से बचा जा सके और लोगों को राहत मिल सके।

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