महंगाई बढ़ी, जिम्मेदारियां बढ़ीं… अब बजट से उम्मीद सिर्फ घोषणाओं की नहीं, “राहत” की है—खासकर कामकाजी महिलाओं के लिए।
Karnal News: कामकाजी महिलाओं को आयकर में राहत की मांग, GST कम करने पर जोर
करनाल। कामकाजी महिलाओं को आयकर में राहत देने की मांग इस बार केंद्रीय बजट से जुड़ी सबसे अहम उम्मीदों में शामिल हो गई है। महंगाई के तेज़ दौर में घर की जिम्मेदारी, बच्चों की पढ़ाई, किराया, ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर वेतन वृद्धि सीमित है और टैक्स बोझ स्थायी दबाव बनता जा रहा है। यही कारण है कि करनाल की नौकरीपेशा महिलाएं चाहती हैं कि बजट 2026 में सरकार उनके लिए ठोस फैसले ले—इनकम टैक्स स्लैब में राहत, मानक कटौती (Standard Deduction) बढ़ाने, स्वास्थ्य बीमा कवर बढ़ाने, जरूरी सामानों पर GST कम करने और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सुविधाएं मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाए।
कामकाजी महिलाओं का कहना है कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होना चाहिए, बल्कि यह उन लोगों की वास्तविक ज़रूरतों का जवाब भी हो जो देश की आर्थिक व्यवस्था को चलाने में हर दिन अपना योगदान दे रहे हैं। ऑफिस, बैंक, निजी कंपनियां, नाइट शिफ्ट, फ्रीलांस, कॉन्ट्रैक्ट जॉब—हर सेक्टर में महिलाएं आगे बढ़ रही हैं, लेकिन उन्हें सुविधाएं और टैक्स राहत अब भी बराबर स्तर पर नहीं मिल पा रही।
क्यों खास है कामकाजी महिलाओं का मुद्दा?
एक तरफ महिलाएं नौकरी कर रही हैं, दूसरी तरफ घरेलू जिम्मेदारियां भी अधिकांश मामलों में उन्हीं पर रहती हैं। यह “डबल शिफ्ट” की तरह है—दफ्तर की शिफ्ट और घर की शिफ्ट। महंगाई के साथ-साथ डेली कम्यूट, बच्चों की कोचिंग, मेड/होम हेल्प, हेल्थ चेकअप, मेंटल स्ट्रेस—इन सबका खर्च बढ़ता जा रहा है। महिलाएं मानती हैं कि बजट में यदि कुछ लक्षित फैसले लिए जाएं तो उनकी बचत बढ़ सकती है, तनाव घट सकता है और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ आर्थिक विकास में योगदान दे सकती हैं।
“टैक्स स्लैब में राहत मिले, Standard Deduction बढ़े” – शुभ लक्ष्मी
करनाल के सेक्टर-32 की रहने वाली और प्राइवेट कंपनी में कार्यरत शुभ लक्ष्मी कहती हैं कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, जबकि उसके मुकाबले वेतन बढ़ोतरी कम है।
उनका कहना है—
“हम टैक्स भी देते हैं, बच्चों की पढ़ाई भी संभालते हैं, घर भी चलाते हैं। अगर इनकम टैक्स स्लैब में राहत मिले और मानक कटौती बढ़े, तो थोड़ा सुकून मिलेगा। किराया, ट्रांसपोर्ट और बच्चों के खर्च के लिए बजट में ऐसे प्रावधान होने चाहिए जो वास्तविक राहत दें।”
शुभ लक्ष्मी जैसी लाखों नौकरीपेशा महिलाओं की मांग है कि
- Standard Deduction बढ़ाया जाए
- मध्यम आय वर्ग को टैक्स स्लैब में राहत मिले
- किराया/कम्यूट जैसी जरूरतों को टैक्स लाभ के दायरे में व्यावहारिक रूप से मजबूत किया जाए
“Health Insurance बढ़े, मातृत्व लाभ और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान हो” – मीनाक्षी
वसंत विहार कॉलोनी की रहने वाली बैंक कर्मचारी मीनाक्षी बताती हैं कि महिला कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा सबसे जरूरी मुद्दा है।
वे कहती हैं—
“नौकरी के साथ परिवार संभालने वाली महिलाओं के लिए हेल्थ इंश्योरेंस बेहद जरूरी है। बजट में महिलाओं के लिए Health Insurance Cover बढ़ाया जाना चाहिए। मातृत्व लाभ और मानसिक स्वास्थ्य जैसी जरूरतों पर भी सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए।”
मीनाक्षी के मुताबिक महिलाओं में
- हार्मोनल समस्याएं
- थायरॉइड/PCOS
- एनीमिया
- और बढ़ता मेंटल स्ट्रेस
आम हो रहा है। ऐसे में महिला-केंद्रित स्वास्थ्य सुविधाएं और बीमा योजनाओं को मजबूत करना समय की मांग है।
“जरूरी सामान पर GST कम हो” – साक्षी
मधुबन क्षेत्र की रहने वाली और निजी कंपनी में कार्यरत साक्षी का कहना है कि नौकरीपेशा महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या “घर का मासिक बजट” है।
उनके अनुसार—
“हम जैसी महिलाओं का वेतन सीमित होता है और महंगाई का असर सबसे पहले घर के खर्च पर पड़ता है। जरूरी सामान, कपड़े, कॉस्मेटिक और निजी प्रयोग के उत्पादों पर टैक्स कम किया जाए। रोजमर्रा के खर्च कम होंगे तभी असली राहत मिलेगी।”
यह मांग केवल “कॉस्मेटिक” तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं की दैनिक जरूरतों से जुड़ी है—जैसे
- पर्सनल केयर
- हाइजीन प्रोडक्ट्स
- आवश्यक कपड़े
- घरेलू जरूरतों की वस्तुएं
“नाइट शिफ्ट महिलाओं के लिए सुरक्षित ट्रांसपोर्ट बढ़े” – नाव्या शर्मा
करनाल की पालम कॉलोनी निवासी नाव्या शर्मा नाइट शिफ्ट में काम करती हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा है।
वह कहती हैं—
“नाइट शिफ्ट में घर से ऑफिस और ऑफिस से घर आने-जाने में डर लगता है। बजट में सुरक्षित ट्रांसपोर्ट, हॉस्टल और महिलाओं के लिए खास सुरक्षा योजनाओं पर खर्च बढ़ाया जाना चाहिए। सुरक्षित माहौल होगा तभी महिलाएं बिना डर काम कर सकेंगी।”
नाव्या जैसी महिलाओं के लिए बजट में
- Safe Transport Scheme
- ऑफिस कम्यूट में महिला सुरक्षा प्रावधान
- पिंक बस/शटल सुविधा
- नाइट हेल्पलाइन/इमरजेंसी इंफ्रास्ट्रक्चर
जैसे कदम जरूरी माने जा रहे हैं।
“Freelancer महिलाओं के लिए अलग टैक्स राहत और सामाजिक सुरक्षा हो” – मीनू गुप्ता
वसंत विहार निवासी फ्रीलांसर मीनू गुप्ता बताती हैं कि ठेके पर काम या फ्रीलांसिंग करने वाली महिलाओं के सामने एक अलग चुनौती है।
वह कहती हैं—
“फ्रीलांस और ठेके पर काम करने वाली महिलाओं को टैक्स और सामाजिक सुरक्षा का ज्यादा बोझ झेलना पड़ता है। बजट में हमारे लिए अलग टैक्स राहत, पेंशन और स्वास्थ्य कवर जैसी सुविधाएं होनी चाहिए।”
यह बहुत बड़ा मुद्दा है क्योंकि आज हजारों महिलाएं
- कंटेंट/डिजिटल फील्ड
- डिजाइनिंग
- ब्यूटी/होम सर्विस
- ऑनलाइन ट्यूटरिंग
- कंसल्टेंसी
जैसे काम फ्रीलांस बेस पर कर रही हैं, लेकिन उनके पास - स्थायी हेल्थ इंश्योरेंस
- पेंशन सिस्टम
- नौकरी जैसी सुरक्षा नहीं होती।
बजट में महिलाओं की प्रमुख अपेक्षाएं (Points Summary)
कुल मिलाकर करनाल की कामकाजी महिलाएं बजट 2026 में चाहती हैं:
1) इनकम टैक्स में राहत
- टैक्स स्लैब में सुधार
- Standard Deduction बढ़े
- मध्यम वर्ग की आय पर बोझ घटे
2) हेल्थ और बीमा सुरक्षा
- महिलाओं के लिए Health Insurance Cover बढ़े
- मातृत्व लाभ मजबूत हो
- मेंटल हेल्थ पर नीति बने
3) GST में कटौती
- जरूरी सामान पर GST कम
- पर्सनल केयर/महिला उपयोग के उत्पाद सस्ते हों
4) वर्किंग वुमन सेफ्टी
- नाइट शिफ्ट ट्रांसपोर्ट
- महिला हॉस्टल
- सुरक्षा योजनाओं को बजट सपोर्ट
5) फ्रीलांसर/कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा
- पेंशन
- स्वास्थ्य कवरेज
- टैक्स राहत की अलग व्यवस्था
Editorial Insight (Editor’s Note)
अगर सरकार बजट में कामकाजी महिलाओं पर केंद्रित निर्णय लेती है तो उसका असर केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा। इसका लाभ देश की उत्पादकता, सामाजिक स्थिरता और आर्थिक मजबूती तक जाएगा। महिलाओं की बचत बढ़ेगी, तनाव घटेगा, और वे रोजगार में लंबे समय तक टिकी रहेंगी।
महिला सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधार भावनात्मक नहीं, आर्थिक सुरक्षा है।
