घरौंडा जनसमस्या सुनवाई: विस अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कल्याण फार्म पर लगाई जनसुनवाई, चौपाल से पीएचसी तक दिए समाधान के संकेत

घरौंडा जनसमस्या सुनवाई: विस अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कल्याण फार्म पर लगाई जनसुनवाई, चौपाल से पीएचसी तक दिए समाधान के संकेत
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क्या इस बार ग्रामीणों की चौपाल, स्कूल और सीवरेज की समस्या सच में होगी दूर? घरौंडा जनसमस्या सुनवाई में उठे बड़े मुद्दे, विस अध्यक्ष ने दिया भरोसा!

घरौंडा जनसमस्या सुनवाई: उम्मीदों और आश्वासनों के बीच समाधान की राह

घरौंडा। घरौंडा जनसमस्या सुनवाई के तहत शनिवार को हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने अपने कल्याण फार्म पर क्षेत्रवासियों की समस्याएं सुनीं। सुबह से ही विभिन्न गांवों के लोग अपनी मांगों और शिकायतों के साथ पहुंचे। चौपाल निर्माण, स्कूल अपग्रेडेशन, पीएचसी स्थापना, सीवरेज और नाला पक्का कराने जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने आए।

चौपाल से शुरू हुई चर्चा, विकास की लंबी सूची तक पहुंची

ग्रामीणों ने गांव फूसगढ़ में पाल समाज की चौपाल की चहारदीवारी, रसोईघर और एक कमरे के निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करने की मांग रखी। इसके साथ ही नाला पक्का कराने और स्कूल को अपग्रेड करने का अनुरोध किया गया।

गांव पूंडरी की निवासी मोनिका ने आंबेडकर नवीनीकरण आवासीय योजना के तहत स्वीकृत 80 हजार रुपये की अनुदान राशि का लाभ न मिलने की शिकायत रखी। उन्होंने बताया कि आवेदन स्वीकृत होने के बावजूद राशि अब तक जारी नहीं हुई है।

इस पर विस अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पात्र लाभार्थियों को अनुदान का लाभ शीघ्र मिलेगा और प्रशासनिक स्तर पर लंबित मामलों की समीक्षा की जाएगी।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष फोकस

जनसमस्या सुनवाई में स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। ग्रामीणों ने क्षेत्र में पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) बनवाने की मांग की, ताकि छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए शहर का रुख न करना पड़े।

इसी दौरान कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज और शुगर मिल के कर्मचारियों ने भी अपनी समस्याएं रखीं। सिक्योरिटी मैन का पदनाम बदलकर सिक्योरिटी गार्ड करने और नियमानुसार वेतन देने की मांग की गई।

अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से वार्ता कर इस विषय में उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जनसुनवाई का यह स्वरूप महज एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि लोकतंत्र के उस जमीनी चेहरे की झलक था जहां आमजन सीधे अपने जनप्रतिनिधि के समक्ष अपनी पीड़ा रखते हैं।

अधूरे चौपाल कार्यों पर सख्त रुख

गांव शाहजानपुर (धयाना) निवासी सतपाल वाल्मीकि ने चौपाल के अधूरे कार्य को पूरा करवाने की मांग की। इस पर अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कहा, “किसी भी चौपाल को अधूरा नहीं रहने दिया जाएगा। सामुदायिक भवन गांव की सामाजिक एकता का केंद्र होते हैं।”

गांव रायपुर जाटान के रोहताश पहलवान, झिमरेहडी के सलिंद्र मोकल, राजेश नंबरदार और जसबीर फौजी ने भी क्षेत्रीय समस्याओं से अवगत कराया।

एससीबीसी कॉलोनी की गलियां और सीवरेज: बुनियादी जरूरत

एससीबीसी कॉलोनी में गलियों और सीवरेज लाइन डालने की मांग ने प्रशासनिक ढांचे की कमजोरियों को उजागर किया। बरसात के दिनों में जलभराव और गंदगी की समस्या से लोगों का जीवन प्रभावित होता है।

अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

जनसुनवाई का लोकतांत्रिक महत्व

लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और जनता के बीच सीधा संवाद विश्वास को मजबूत करता है। कल्याण फार्म पर हुई यह बैठक एक राजनीतिक आयोजन से अधिक सामाजिक संवाद का मंच बन गई।

जनसुनवाई की यह परंपरा यदि नियमित और परिणामपरक रहे तो ग्रामीण विकास की गति को नया आयाम मिल सकता है।

विश्लेषण: क्या बदलेंगे हालात?

20 वर्षों की पत्रकारिता में मैंने अनेक जनसुनवाई देखी हैं। अधिकतर मामलों में समस्याएं दर्ज होती हैं, आश्वासन मिलता है और फाइलें आगे बढ़ जाती हैं। परंतु असली कसौटी कार्यान्वयन की होती है।

यदि चौपाल निर्माण, स्कूल अपग्रेडेशन और पीएचसी स्थापना जैसी मांगें समयबद्ध योजना में शामिल की जाती हैं तो यह क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को मजबूत करेगा।

निष्कर्ष

घरौंडा की इस जनसमस्या सुनवाई ने यह संकेत दिया है कि लोकतंत्र का असली अर्थ जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनना और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना है।

अब नज़र इस बात पर होगी कि दिए गए आश्वासन कितनी जल्दी धरातल पर उतरते हैं।

यदि प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हुई तो आने वाले महीनों में चौपालों की दीवारें खड़ी होंगी, स्कूल अपग्रेड होंगे और कॉलोनियों में सीवरेज लाइन बिछेगी। वरना यह भी एक और आश्वासन भर रह जाएगा।

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