ओलावृष्टि का कहर: 11 एकड़ सरसों नष्ट, किसानों को भारी नुकसान – मुआवजे की मांग तेज

ओलावृष्टि का कहर: 11 एकड़ सरसों नष्ट, किसानों को भारी नुकसान - मुआवजे की मांग तेज
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बराड़ा: हरियाणा के बराड़ा क्षेत्र में शुक्रवार शाम अचानक हुई भारी ओलावृष्टि से किसानों को बड़ा झटका लगा। पहले से ही खराब मौसम और रुक-रुक कर हो रही बूंदाबांदी के बीच इस अप्रत्याशित ओलावृष्टि ने सरसों, गेहूं, आलू और अन्य फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचाया। खेतों में फसलें बिछ गईं, ओलों की परतें जम गईं, और किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं।

ओलों की मार से तबाह हुई सरसों की फसल

गांव सीवनमाजरा के किसान हरप्रीत सिंह ने बताया कि इस ओलावृष्टि से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। हरप्रीत सिंह ठेके पर जमीन लेकर खेती करते हैं और इस बार उन्होंने 11 एकड़ में सरसों की फसल उगाई थी। चार दिन पहले ही उनकी फसल कटाई के बाद खेतों में रखी हुई थी, लेकिन अचानक हुई ओलावृष्टि ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। सरसों की बालियों पर ओले गिरने से दाने झड़ गए और पानी में बह गए, जिससे उन्हें इकट्ठा करना असंभव हो गया।

गेहूं, आलू और सब्जियों को भी नुकसान

ओलावृष्टि का असर सिर्फ सरसों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गेहूं की फसल भी प्रभावित हुई। तेज ओलावृष्टि के कारण गेहूं की बालियों पर सीधा असर पड़ा, जिससे दाना कमजोर हो गया और खेतों में बिछने से पैदावार में कमी आने की आशंका बढ़ गई।

इसके अलावा, आलू की फसल जो कटाई के लिए लगभग तैयार थी, वह भी भारी नुकसान की चपेट में आ गई। खेतों में पड़े ओलों के कारण आलू की गुणवत्ता प्रभावित हुई, जिससे किसानों को बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। वहीं, फलों के पौधों पर जो बौर आ रहा था, वह भी नष्ट हो गया, जिससे आगामी सीजन में फलों की पैदावार प्रभावित होगी।

सब्जियों की फसल भी इस प्राकृतिक आपदा से अछूती नहीं रही। मिर्च, सूरजमुखी, बरसीम जैसी फसलें बर्बाद हो गईं। ओलों के प्रकोप का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार तक भी खेतों में ओले जमे हुए थे, जो गर्मी के बावजूद नहीं पिघले।

किसानों की बढ़ी चिंता, कर्ज चुकाने की दिक्कत

हरप्रीत सिंह और अन्य किसानों की परेशानी सिर्फ फसल नष्ट होने तक ही सीमित नहीं है। वे पहले ही कर्ज के दबाव में खेती कर रहे थे, अब जब फसल बर्बाद हो गई है, तो उन्हें यह चिंता सता रही है कि वे ठेके के पैसे और अन्य कृषि खर्चों को कैसे पूरा करेंगे।

गांव के अन्य किसान योगेश शर्मा, अतिंद्र पाल, कुलदीप सिंह थंबड, रकम सिंह, सुरेन्द्र राणा, प्रताप पप्पी, भूपिंदर संजू, प्रविंदर सिंह, जतिन छाबड़ा, रामसिंह और सुरजीत सिंह ने बताया कि इस बार इतनी भारी ओलावृष्टि कई वर्षों बाद हुई है। उन्होंने कहा कि यह नुकसान इतना बड़ा है कि इसकी भरपाई किसानों के लिए नामुमकिन है।

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सरकार से मुआवजे की मांग तेज

क्षेत्र के किसानों ने सरकार से मांग की है कि तुरंत स्पेशल गिरदावरी (फसल नुकसान का विशेष सर्वे) करवाई जाए और पीड़ित किसानों को मुआवजा दिया जाए।

किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि से हुए नुकसान की सही रिपोर्ट बनाई जाए और जल्द से जल्द राहत राशि वितरित की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि कृषि बीमा योजना के तहत किसानों को उनका उचित हक मिले, ताकि वे इस प्राकृतिक आपदा के प्रभाव से उबर सकें।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

स्थानीय प्रशासन ने किसानों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही फसल नुकसान का सर्वे करवाया जाएगा और सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। हालांकि, किसानों का कहना है कि हर बार सरकार सर्वे तो करवाती है, लेकिन मुआवजा देने में देरी होती है, जिससे वे आर्थिक संकट में घिर जाते हैं।

निष्कर्ष

ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाएं किसानों के लिए हमेशा एक बड़ा संकट साबित होती हैं। बराड़ा क्षेत्र के किसानों को हुए इस नुकसान ने यह दिखा दिया है कि मौसम की अनिश्चितता उनकी मेहनत को एक झटके में नष्ट कर सकती है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह किसानों की मदद के लिए तुरंत कदम उठाए, स्पेशल गिरदावरी करवाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा प्रदान करे।

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