हरियाणा सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अब नए नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। अब यदि किसी अधिकारी का आचरण खराब पाया जाता है, उसकी कार्यकुशलता पर सवाल उठते हैं या उसके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, तो 50 वर्ष की आयु के बाद उसे सेवा विस्तार नहीं मिलेगा। यह कदम सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत उठाया गया है।
भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर गिरेगी गाज
हरियाणा सरकार ने सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार फैलाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर शिकायतें मिलती हैं, उसकी कार्यशैली असंतोषजनक होती है या उसकी एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) खराब होती है, तो उसे जबरन रिटायर कर दिया जाएगा।
50 साल के बाद सेवा विस्तार पर लगेगी रोक
हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रुप A और ग्रुप B के अधिकारियों के कार्यकाल की समीक्षा 50 वर्ष की उम्र में की जाएगी, जबकि ग्रुप C अधिकारियों की समीक्षा 55 वर्ष की उम्र में होगी। इस समीक्षा में पिछले 10 वर्षों की एसीआर देखी जाएगी। यदि किसी अधिकारी को 7 या उससे अधिक बार अच्छी रिपोर्ट नहीं मिली है, तो उसका कार्य असंतोषजनक माना जाएगा और उसे सेवा विस्तार नहीं मिलेगा।
मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति है और इसे सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने एक विशेष कमेटी गठित की है, जो सरकारी अधिकारियों के कार्यों का मूल्यांकन करेगी। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप सिद्ध होते हैं, तो उसे आठ साल की नौकरी गंवानी पड़ सकती है।
कैसे होगी अधिकारियों की समीक्षा?
सरकार ने समीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कड़े मानदंड तय किए हैं:
- 10 साल की एसीआर रिपोर्ट: अधिकारियों की पिछली 10 साल की गोपनीय रिपोर्टों की समीक्षा होगी।
- 7 बार अच्छी रिपोर्ट अनिवार्य: यदि किसी अधिकारी को 7 या उससे अधिक बार अच्छी रिपोर्ट नहीं मिली है, तो उसकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है।
- विशेष कमेटी का गठन: एक उच्च स्तरीय कमेटी अधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा करेगी।
- सेवा विस्तार पर रोक: यदि कोई अधिकारी तय मानकों को पूरा नहीं करता, तो 50 साल की उम्र के बाद उसे जबरन रिटायर किया जा सकता है।
जबरन सेवानिवृत्ति से बचने का क्या है विकल्प?
हरियाणा सरकार ने अधिकारियों को निष्पक्षता का मौका देने के लिए एक अपीलेट कमेटी गठित करने का भी फैसला किया है। जबरन सेवानिवृत्त किए गए अधिकारी इस कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं। इसके अलावा, बोर्ड और निगमों में भी इसी तरह की समीक्षा प्रक्रिया लागू करने की योजना बनाई जा रही है।
सरकार का सख्त संदेश: भ्रष्ट अधिकारी नहीं बचेंगे!
मुख्य सचिव ने कहा कि पहले भी ये नियम बने थे, लेकिन अब सरकार इन्हें पूरी सख्ती से लागू करेगी। भ्रष्टाचार और अकुशलता के मामलों में किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
पिछले महीने एक अधिकारी को किया गया जबरन रिटायर
हरियाणा सरकार ने हाल ही में 2011 बैच के एचसीएस अधिकारी रीगन कुमार को जबरन रिटायर कर दिया। उन पर कई गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद सरकार ने उन्हें सेवा से हटा दिया। 29 जनवरी को उनका अंतिम कार्य दिवस था। यह सरकार की ओर से एक सख्त संदेश है कि यदि कोई अधिकारी अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं करता, तो उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।
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क्या कहती है सरकार की नई नीति?
- भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को मिलेगी सख्त सजा।
- 50 वर्ष की आयु के बाद सेवा विस्तार सिर्फ योग्य अधिकारियों को मिलेगा।
- हर 10 साल की एसीआर रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा मूल्यांकन।
- अपील करने के लिए अपीलेट कमेटी की व्यवस्था।
- बोर्ड और निगमों में भी लागू होगी समीक्षा प्रक्रिया।
निष्कर्ष: सरकारी तंत्र में सुधार की दिशा में बड़ा कदम
हरियाणा सरकार का यह कदम सरकारी तंत्र को साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। यह नियम उन अधिकारियों के लिए एक सख्त चेतावनी है, जो अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं या कार्य के प्रति लापरवाह हैं। सरकार का साफ संदेश है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
