कांग्रेस में भीतरघात! संगठन की अनदेखी पर वरुण चौधरी ने प्रभारी को दिखाया आईना
हरियाणा में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर से गर्मा गई है। निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस के नेताओं में संगठनात्मक फेरबदल को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया द्वारा जारी की गईं चार सूचियों को लेकर पार्टी के ही वरिष्ठ नेता सवाल उठा रहे हैं। इस बीच अंबाला से कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने पार्टी संगठन को मजबूत करने की जरूरत पर बल देते हुए पार्टी प्रभारी को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है।
निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस में कलह
राज्य में निकाय चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन कांग्रेस में मतभेद की तस्वीर साफ़ होती जा रही है। मंगलवार को कांग्रेस प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने निकाय चुनाव से जुड़े चार अलग-अलग सूचियां जारी की थीं। इन सूची में कई ऐसे लोगों के नाम भी शामिल किए गए थे, जिनकी सक्रियता को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष है। यह असंतोष केवल आम कार्यकर्ताओं तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि खुद सांसद वरुण चौधरी इस पर खुलकर सामने आ गए हैं।
बुधवार को सांसद वरुण चौधरी ने प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया को खुला पत्र लिखकर चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पार्टी को इन सूचीबद्ध नामों से ज्यादा ज़रूरत ब्लॉक स्तर पर संगठन खड़ा करने की है। उनका कहना है कि निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन तभी संभव होगा, जब कांग्रेस का जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन खड़ा हो। वरना यह चुनाव पार्टी के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है।
संगठन मजबूत करना प्राथमिकता, न कि विवादास्पद सूची जारी करना
वरुण चौधरी ने प्रदेश प्रभारी को दिए पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि हरियाणा में कांग्रेस का मजबूत ब्लॉक स्तर तक का संगठन बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, पार्टी में जिन नामों को निकाय चुनाव के लिए प्रभारी बनाया गया है, उनमें से कुछ नेता कांग्रेस विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। चौधरी का आरोप है कि कुछ नेताओं ने बीते विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ ही प्रचार किया था, और ऐसे लोगों को जिम्मेदारी सौंपना पार्टी हित के खिलाफ होगा।
वरुण चौधरी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि संगठन खड़ा करना ही कांग्रेस को मजबूती दे सकता है, न कि ऐसी सूची जारी करना, जिसमें निष्क्रिय नेताओं को तरजीह दी गई हो। उनका कहना था कि अगर पार्टी इसी तरह बिना मजबूत संगठन के चुनावी जंग में उतरेगी तो उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अनदेखी पर सवाल
वरुण चौधरी ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रदेश प्रभारी से कई बार आग्रह किया गया था कि संगठन को प्राथमिकता दी जाए, लेकिन जब बार-बार आग्रह करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो उन्होंने सोशल मीडिया पर पत्र को सार्वजनिक करने का फैसला लिया।
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने पत्र को साझा करते हुए उन्होंने लिखा, “बार-बार आग्रह करने पर भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब मुझे मजबूर होकर यह सार्वजनिक करना पड़ा। हरियाणा कांग्रेस को विधायक दल का नेता चुनने की ओर ध्यान देना चाहिए।”
पत्र सार्वजनिक होते ही सियासी हलचल
जैसे ही वरुण चौधरी का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हरियाणा कांग्रेस में हलचल तेज़ हो गई। राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी के भीतर गुटबाजी का नया अध्याय बताया जा रहा है। कांग्रेस के ही कई नेता पिछले कुछ महीनों से संगठन की कमी को हार की वजह बताते रहे हैं, और अब वरुण चौधरी का सार्वजनिक मंच पर प्रदेश प्रभारी पर सवाल उठाना सभी को चौंका रहा है।
कांग्रेस नेतृत्व पर नाराजगी
वरुण चौधरी का पत्र केवल निकाय चुनाव की सूची पर आपत्ति नहीं था, बल्कि यह प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर भी सवाल उठाता है।
उनका कहना है कि संगठन की हालत इतनी दयनीय हो चुकी है कि कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही, और इसके परिणामस्वरूप चुनावों में हार का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का भविष्य तभी उज्जवल होगा जब संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूती दी जाएगी।
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पार्टी में दरार की ओर इशारा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वरुण चौधरी का यह कदम कांग्रेस पार्टी के अंदर दो बड़े धड़ों की लड़ाई की ओर इशारा करता है। निकाय चुनाव से पहले जारी की गई विवादास्पद सूची एक तरह से नेतृत्व क्षमता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। इस पत्र के सार्वजनिक होते ही कांग्रेस पार्टी में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
अब आगे क्या?
अब देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस हाईकमान इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है। क्या दीपक बावरिया पर सवाल उठाने के बाद वरुण चौधरी को किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, या फिर पार्टी संगठन में सुधार की दिशा में कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा?
हालांकि, एक बात तो साफ़ है – कांग्रेस को यदि निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना है तो आंतरिक कलह को समाप्त कर, संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना ही एकमात्र रास्ता है।
