भिवानी: बच्चे की मौत पर विवाद, धरना जारी, परिजनों की न्याय की गुहार
पारिवारिक आक्रोश और अस्पताल प्रशासन पर सवाल
भिवानी में एक बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद पारिवारिक आक्रोश और जनसमूह का धरना प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। घटना ने चिकित्सा क्षेत्र में विश्वास की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का सिलसिला: कैसे बिगड़ी बच्चे की तबीयत?
हिसार जिले के आजाद नगर निवासी सन्नी नामक महिला ने सिविल लाइन पुलिस को बयान दिया कि उनके 12 वर्षीय पुत्र हितेश की वीरवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई। हितेश को तुरंत भिवानी के एक निजी अस्पताल में सुबह दस बजे भर्ती कराया गया। अस्पताल के चिकित्सकों ने शुरुआती जांच में बच्चे की हालत स्थिर बताई और उसे उचित इलाज का भरोसा दिया।
लेकिन शाम पांच बजे डॉक्टरों ने अचानक हितेश को मृत घोषित कर दिया। यह खबर परिवार के लिए एक बड़ा झटका थी, क्योंकि कुछ घंटे पहले तक डॉक्टर बच्चे की हालत में सुधार की बात कर रहे थे। सन्नी का आरोप है कि उनके बेटे को समय पर और उचित इलाज नहीं मिला, जिसके कारण उसकी जान चली गई।
पोस्टमार्टम और पुलिस कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए, सिविल लाइन पुलिस ने चिकित्सकों के बोर्ड द्वारा शनिवार को बच्चे का पोस्टमार्टम करवाया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने परिजनों को शव सौंपने का प्रयास किया, लेकिन परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक आरोपी चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती और उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे बच्चे का शव स्वीकार नहीं करेंगे।
धरने का केंद्र: जिला नागरिक अस्पताल परिसर
परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए जिला नागरिक अस्पताल परिसर में स्थित पुलिस चौकी के बाहर धरना शुरू कर दिया। शनिवार देर शाम से शुरू हुआ यह धरना रविवार को भी जारी रहा। धरने में कई जनसंगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय लोग शामिल हुए।
जनसंगठनों और वकीलों का समर्थन
धरने में शामिल हुए एडवोकेट सुनीता गोलपुरिया ने स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपी चिकित्सक पर एफआईआर दर्ज होने और उनकी गिरफ्तारी तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का अधिकार है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें।
परिजनों की मांगें: न्याय के लिए एकजुटता
हितेश के परिजनों ने मांग की है:
- आरोपी चिकित्सक पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो।
- मृतक बच्चे के इलाज में हुई लापरवाही की जांच हो।
- दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
परिजनों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल उनके बेटे के लिए नहीं है, बल्कि ऐसे किसी भी संभावित मामले को दोहराए जाने से रोकने के लिए है।
अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
इस पूरे प्रकरण में निजी अस्पताल प्रशासन पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकों ने सही समय पर उचित उपचार नहीं दिया। यदि हितेश को समय रहते सही इलाज मिलता, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों पर किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।
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स्थानीय प्रशासन की भूमिका
स्थानीय पुलिस ने परिजनों और धरनार्थियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। प्रशासनिक अधिकारी धरना स्थल पर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
सामाजिक पहलू और जनाक्रोश
यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं है। स्थानीय नागरिकों और संगठनों ने भी घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि चिकित्सा क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं विश्वासघात के समान हैं और इसे किसी भी हाल में सहन नहीं किया जाना चाहिए।
मामले का निष्कर्ष: न्याय की राह में संघर्ष
भिवानी में चल रहा यह धरना सामाजिक अन्याय और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर एक गंभीर बहस की शुरुआत करता है।
परिजनों की न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और जनता की एकजुटता इस मुद्दे को हल करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। स्वास्थ्य प्रशासन और सरकारी अधिकारियों को अब तेज और निष्पक्ष कार्रवाई करनी होगी, ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों।
