यूएनजीए में पेश हुए इस प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देशों में भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, चीन, लेबनान, ईरान, इराक, और इंडोनेशिया भी शामिल हैं. वहीं, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका, पलाउ, माइक्रोनेशिया, इजरायल, कनाडा, और मार्शल आइलैंड ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया है.
संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल के बारे में एक प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें सीरिया के गोलन हाइट्स से इजरायल को अपना कब्जा हटाने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव का 91 देशों ने समर्थन दिया है, जिसमें भारत भी शामिल है।
यूएन में इस प्रस्ताव को मिस्र ने पेश किया था, जिसमें 91 वोट पक्षपाती साबित होते हैं, जबकि इसके खिलाफ आठ देशों ने वोटिंग की। इसके दौरान, 62 देश ने वोट देने से इनकार किया।
प्रस्ताव में उच्चारित किया गया है कि यूएनजीए और सुरक्षा परिषद की प्रस्तावना को मध्यस्थ रूप से रखते हुए इजरायल को सीरियाई गोलन हाइट्स पर कब्जा छोड़ देना चाहिए। इजरायल ने 1967 में गोलन हाइट्स पर कब्जा किया था।
वहीं, यूक्रेन, फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क, बेल्जियम, जापान, केन्या, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, और स्पेन की तरह 62 देशों ने इस प्रस्ताव पर वोटिंग से दूरी बना ली। इस प्रस्ताव पर वोटिंग 28 नवंबर को हुई थी।
गोलन हाइट्स पश्चिमी सीरिया में एक क्षेत्र है, जिस पर पांच जून 1967 को इजरायल ने कब्जा कर लिया था। इस क्षेत्र का कब्जा इजरायल ने 1967 में छह दिनों तक चले युद्ध के दौरान किया था।
क्या है गोलन हाइट्स?
गोलन हाइट्स पश्चिमी सीरिया में स्थित एक पहाड़ी इलाका है, जिस पर इजरायल ने 1967 में सीरिया के साथ छह दिनों के युद्ध के बाद कब्जा कर लिया था। उस समय, इस इलाके में रहने वाले ज्यादातर सीरियाई अरब लोग अपने घर छोड़कर चले गए थे।
सीरिया ने 1973 में मध्यपूर्व युद्ध के दौरान गोलन हाइट्स पर एक बार फिर से कब्जा करने का प्रयास किया, लेकिन यह सफल नहीं हुआ। 1974 में, दोनों देशों ने इस क्षेत्र में युद्धविराम लागू कर दिया। संयुक्त राष्ट्र की सेना 1974 से युद्धविराम रेखा पर तैनात है। 1981 में इजरायल ने गोलन हाइट्स को अपने क्षेत्र में मिलाने की एकतरफा घोषणा की थी, लेकिन इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली थी।
