अमेरिका ने ईरान में इजरायली हमले पर चुप्पी बरती,पहले ही दी थी ‘काउंटर अटैक’ नहीं करने की सलाह

अमेरिका ने ईरान में इजरायली हमले पर चुप्पी बरती,पहले ही दी थी 'काउंटर अटैक' नहीं करने की सलाह
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अमेरिका ने ईरान के खिलाफ इजरायल के काउंटर अटैक पर चुप्पी साध ली. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरिन जीन-पियरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनसे इस विषय पर पूछे जाने पर किसी भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. बताया जा रहा है कि इससे पहले ही अमेरिका ने पहले ही इस्राइल को ईरान पर हमला नहीं करने की सलाह दी थी.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ इजरायल द्वारा किए गए काउंटर अटैक पर चुप्पी साध ली है.

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरिन जीन-पियरे ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात की घोषणा की कि “मुझे पता है कि मिडिल ईस्ट के रिपोर्ट पर सभी की बहुत ध्यान है।” मुझे विश्वास है कि आप सभी मुझसे इस विषय (ईरान पर इजरायल का प्रतिक्रियात्मक हमला) के बारे में पूछने आए होंगे, लेकिन हमारे पास इस पर कोई टिप्पणी नहीं है. बाइडन प्रशासन ने अपने प्रारंभिक कदमों में स्पष्ट किया है कि उन्हें इस संघर्ष के बढ़ने की कोई इच्छा नहीं है.

हम अपने सहयोगियों के साथ उनके सुझाव और विचारों का मूल्यांकन करते हुए तनाव को कम करने के लिए परामर्श जारी रखेंगे. यह स्थिति अमेरिका के इजरायल के ईरान पर हमले के बाद आई है, जिसमें अमेरिका ने अपने साथी के समर्थन में खुले समर्थन का इजहार नहीं किया.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बेंजामिन नेतन्याहू को इस संबंध में सलाह दी थी कि अगर ईरान पर कोई जवाबी हमला होता है, तो अमेरिका इसमें तेल अवीव की मदद नहीं करेगा. अब इसराइल के काउंटर अटैक पर अमेरिका की मौनता से सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह संकेत है कि वह अब ईरान के खिलाफ अपना स्टैंड बदल चुका है. जर्मनी और ब्रिटेन के बाद, अब अमेरिका के चुप होने पर भी विश्व की नजरें इस सवाल पर हैं.

इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करेगा: नेतन्याहू

वहीं, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायली वॉर और सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में यह दिलचस्प बात कही थी कि सहयोगी देशों की सलाह चाहे जो भी हो, हम किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और ईरान पर हमला कब करना है इसका फैसला अब हम खुद करेंगे.

दमिश्क में ईरानी दूतावास पर हमले के बाद तनाव में बढ़ोतरी

अप्रैल को, दमिश्क में स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास पर हमला हुआ था, जिसमें 7 ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड के सदस्यों और 6 सीरियाई नागरिकों की मौत हो गई थी. इस्राइल ने इस हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया है, जबकि ईरान इसे इजराइल के हाथों मान रहा है. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 13 अप्रैल को इजरायल पर 300 ड्रोन और मिसाइलें दागी थीं.हालांकि, इन हमलों से  इजरायल में कुछ खास नुकसान नहीं हुआ. इजरायली रक्षा प्रणाली ने एक महत्वपूर्ण हमले में ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट किया, जिससे उन्हें नष्ट कर दिया गया. जो कुछ मिसाइलें बच गईं, उन्हें सिर्फ डेड सी तक पहुंचने का मौका मिला.

ईरान ने कहा, “जवाबी हमले करने का हमारा कोई इरादा नहीं”

एक इजरायली अधिकारी ने विदेशी समाचार एजेंसी से बातचीत में बताया कि पिछले हफ्ते के मिसाइल हमले और ड्रोन बमबारी के बदले में इजरायल ने शुक्रवार को इरान पर एक तड़के कार्रवाई की. संदेश है कि हमले के बावजूद हमें नुकसान की अंदाज़ा नहीं है, लेकिन यह इजरायल की क्षमता को संकेत देता है कि वे ईरान के आंतरिक क्षेत्रों में हमला कर सकते हैं. इस्फहान शहर के निशानेबाज़ी को लेकर तेहरान ने एक मुहैया तथ्य को स्वीकारा, जहाँ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास तीन विस्फोट हुए, जिसे इजरायल के आक्रमण का शिकार माना गया.इस हमले का प्रयोग मिसाइलों के बजाय मिनी ड्रोनों से किया गया था। ईरान ने इसे लेकर कहा कि उसका कोई जवाबी कार्रवाई करने का इरादा नहीं है.

इससे दोनों देशों के बीच तनावित स्थिति में तब्दील न होने के अवसर हैं, और ऐसा लगता है कि यह इस बारीकी तक रुकने के आसार हैं.

इस्फहान शहर में ईरान पर इजरायल का ड्रोन हमला

ईरान के हमले के बाद, इजरायल ने काउंटर अटैक की तैयारी शुरू की है। शुक्रवार रात, इस्फहान शहर को निशाना बनाकर बमबारी की गई. ईरान के विदेश मंत्री ने बताया कि इस्फहान शहर पर इजरायल ने मिनी ड्रोन से हमला किया था, लेकिन उसमें कोई नुकसान या हानि नहीं हुई थी. इस बीच सामने आ रही रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि ईरान पर इजरायल के हमले के लगभग 24 घंटे पहले ही अमेरिका को इसकी सूचना दी गई थी. अमेरिका ने जी-7 समूह के विदेश मंत्रियों को शुक्रवार को बताया कि ईरान में ड्रोन हमले की जानकारी उसे ‘आखिरी क्षणों में’ इजरायल से मिली थी, लेकिन वॉशिंगटन ने इस कार्रवाई में भाग नहीं लिया.

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