बस स्टैंड पर यात्रियों से खुलेआम मनमानी वसूली… न रेट बोर्ड, न सही पर्ची और ऊपर से गंदगी का अंबार। रोडवेज जीएम के अचानक पहुंचे निरीक्षण में सामने आईं ऐसी सच्चाइयां जिसने पूरे सिस्टम पर खड़े कर दिए सवाल।
करनाल/घरौंडा।
घरौंडा बस स्टैंड पार्किंग शुल्क को लेकर लंबे समय से उठ रही शिकायतों ने आखिरकार शनिवार को बड़ा रूप ले लिया, जब हरियाणा रोडवेज के जीएम कुलदीप सिंह अचानक औचक निरीक्षण के लिए बस स्टैंड पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने न सिर्फ यात्रियों की परेशानियों को उजागर किया बल्कि बस स्टैंड की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सबसे बड़ा मामला पार्किंग शुल्क में मनमानी वसूली का सामने आया। विभाग की ओर से 12 घंटे की पार्किंग का निर्धारित शुल्क 10 रुपये तय किया गया है, लेकिन यात्रियों से 20 रुपये तक वसूले जा रहे थे। इतना ही नहीं, यात्रियों को जो पर्ची दी जा रही थी उस पर शुल्क का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। बस स्टैंड परिसर में कहीं भी रेट सूची का बोर्ड नहीं लगाया गया था, जिससे यात्रियों को असली शुल्क की जानकारी ही नहीं मिल पा रही थी।
रोडवेज जीएम कुलदीप सिंह ने मौके पर ही इस गड़बड़ी पर नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट कहा कि यात्रियों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतों ने खोली पोल
सूत्रों के अनुसार विभाग को पिछले कई दिनों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि घरौंडा बस स्टैंड पर पार्किंग के नाम पर यात्रियों से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं। कुछ यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया था कि यदि कोई व्यक्ति अधिक शुल्क देने से मना करता है तो उसके साथ बहस की जाती है।
शनिवार सुबह भी ऐसी ही शिकायत मिलने के बाद जीएम कुलदीप सिंह ने बिना पूर्व सूचना के बस स्टैंड पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कई यात्रियों से बातचीत की गई, जिसमें उन्होंने खुलकर अपनी परेशानी बताई।
एक यात्री ने बताया कि उससे बाइक पार्किंग के लिए 20 रुपये लिए गए जबकि पर्ची पर कहीं भी शुल्क का जिक्र नहीं था। कई लोगों ने कहा कि उन्हें यह पता ही नहीं था कि विभाग की ओर से शुल्क कितना निर्धारित किया गया है क्योंकि वहां कोई बोर्ड नहीं लगाया गया था।
पर्ची में भी खेल, नियमों की अनदेखी
निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पार्किंग की जो पर्चियां यात्रियों को दी जा रही थीं, उनमें शुल्क की राशि का कोई उल्लेख नहीं था। सामान्य तौर पर किसी भी पार्किंग पर्ची पर शुल्क, समय और नियम स्पष्ट रूप से लिखे जाते हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
लेकिन घरौंडा बस स्टैंड पर स्थिति बिल्कुल अलग मिली। इससे साफ संकेत मिला कि यात्रियों से मनमाने तरीके से पैसे वसूले जा रहे थे और शिकायत होने पर ठेकेदार आसानी से बच निकलता था।
जीएम ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से पूछा कि आखिर बिना रेट बोर्ड और बिना सही पर्ची के पार्किंग संचालन कैसे किया जा रहा है। इस पर संबंधित कर्मचारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
जीएम का सख्त रुख
रोडवेज जीएम कुलदीप सिंह ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर पारदर्शिता सबसे जरूरी है। यदि कोई ठेकेदार विभाग के नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई तय है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“यात्रियों से निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। विभागीय नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।”
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर जल्द कार्रवाई की जाए।
सफाई व्यवस्था भी फेल
पार्किंग अनियमितता के अलावा बस स्टैंड की सफाई व्यवस्था भी जीएम की जांच में फेल साबित हुई। परिसर के कई हिस्सों में गंदगी फैली हुई मिली। यात्रियों के बैठने वाले स्थानों के आसपास कूड़ा पड़ा था और सफाई व्यवस्था बेहद कमजोर नजर आई।
हैरानी की बात यह रही कि पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। इस पर जीएम ने नाराजगी जताते हुए अड्डा इंचार्ज को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बस स्टैंड किसी भी शहर की पहली पहचान होता है। यदि वहां गंदगी और अव्यवस्था होगी तो यात्रियों पर गलत प्रभाव पड़ेगा।
वीटा बूथ पर भी मिली गड़बड़ी
निरीक्षण के दौरान वीटा मिल्क बूथ भी जांच के दायरे में आया। वहां यह पाया गया कि निर्धारित डेयरी उत्पादों के अलावा अन्य सामान भी बेचा जा रहा था, जो नियमों के खिलाफ है।
जीएम ने इस पर भी कड़ी नाराजगी जताई और बूथ संचालक को नियमों के तहत काम करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि दोबारा ऐसी शिकायत मिली तो लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी की जा सकती है।
कैंटीन संचालक पर भी कार्रवाई
बस स्टैंड की कैंटीन में भी अव्यवस्था देखने को मिली। कैंटीन के अंदर की बजाय अधिक सामान बाहर रखा गया था, जिससे यात्रियों को आने-जाने में परेशानी हो रही थी और अतिक्रमण जैसी स्थिति बन गई थी।
जीएम कुलदीप सिंह ने तुरंत प्रभाव से बाहर रखा सामान हटाने के आदेश दिए। साथ ही कैंटीन संचालक को चार गुना किराये का नोटिस भेजने की बात कही गई।
अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस प्रकार का अतिक्रमण यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिए खतरा बन सकता है।
यात्रियों ने उठाए बड़े सवाल
निरीक्षण के दौरान कई यात्रियों ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। लोगों का कहना था कि बस स्टैंड पर लंबे समय से अव्यवस्था बनी हुई है लेकिन शिकायतों के बावजूद सुधार नहीं हो रहा था।
कुछ यात्रियों ने कहा कि यदि जीएम अचानक निरीक्षण के लिए नहीं आते तो शायद यह मामला कभी सामने ही नहीं आता।
यात्रियों ने मांग की कि—
- पार्किंग शुल्क का बड़ा बोर्ड लगाया जाए
- हर पर्ची पर शुल्क स्पष्ट लिखा जाए
- सफाई व्यवस्था नियमित हो
- कैंटीन और बूथों की नियमित जांच हो
क्या कहते हैं नियम?
सार्वजनिक बस स्टैंडों पर पार्किंग शुल्क और अन्य सुविधाओं से जुड़े स्पष्ट नियम होते हैं। इनमें—
- शुल्क सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना
- पर्ची पर शुल्क और समय लिखना
- साफ-सफाई बनाए रखना
- लाइसेंस अनुसार ही सामान बेचना
जैसे नियम शामिल हैं।
यदि कोई ठेकेदार इन नियमों का उल्लंघन करता है तो विभाग उसके खिलाफ जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण या ब्लैकलिस्ट जैसी कार्रवाई कर सकता है।
सवाल सिस्टम पर भी
यह मामला केवल एक पार्किंग ठेकेदार की मनमानी तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर इतने लंबे समय तक यह सब चलता कैसे रहा?
यदि विभाग को पहले से शिकायतें मिल रही थीं तो नियमित जांच क्यों नहीं हुई? यात्रियों का कहना है कि कई बार छोटी-छोटी शिकायतें नजरअंदाज कर दी जाती हैं और जब मामला बड़ा हो जाता है तब कार्रवाई होती है।
प्रशासनिक संदेश
जीएम के इस औचक निरीक्षण को प्रशासनिक सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। इससे साफ संकेत गया है कि अब विभाग यात्रियों की शिकायतों को गंभीरता से लेने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे निरीक्षण नियमित रूप से किए जाएं तो बस स्टैंडों की व्यवस्था में काफी सुधार आ सकता है।
जनता क्या चाहती है?
लोगों की सबसे बड़ी मांग पारदर्शिता और जवाबदेही की है। यात्रियों का कहना है कि—
- हर बस स्टैंड पर डिजिटल रेट बोर्ड लगने चाहिए
- शिकायत हेल्पलाइन सक्रिय होनी चाहिए
- पार्किंग और कैंटीन का ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम हो
ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
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