नशा मुक्ति शपथ: घरौंडा कॉलेज में युवाओं ने लिया संकल्प, बोले- नशे को कहो ना, जीवन को हां

नशा मुक्ति शपथ: घरौंडा कॉलेज में युवाओं ने लिया संकल्प, बोले- नशे को कहो ना, जीवन को हां
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हरियाणा के करनाल में युवाओं ने उठाया बड़ा कदम… सरकारी कॉलेज घरौंडा में गूंजे नशा मुक्त भारत के नारे, छात्रों ने खुद भी शपथ ली और दूसरों को भी नशे से दूर रखने का संकल्प किया।

करनाल। नशा मुक्ति शपथ के जरिए युवाओं को जागरूक करने की दिशा में बुधवार को राजकीय महाविद्यालय घरौंडा में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। “नशे को कहो ना-जीवन को हां” और “हम सबका एक ही नारा-नशामुक्त हो देश हमारा” जैसे नारों के साथ कॉलेज परिसर पूरी तरह जागरूकता के संदेश से गूंज उठा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को न केवल नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई गई, बल्कि समाज में फैल रही नशे की प्रवृत्ति के खिलाफ जागरूक नागरिक बनने का संदेश भी दिया गया।

कार्यक्रम का संचालन राजकीय महाविद्यालय घरौंडा के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. सुरेंद्र कुमार नागिया ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति है और यदि युवा वर्ग नशे से दूर रहेगा तो देश का भविष्य सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति को भी प्रभावित करता है।

कॉलेज परिसर में गूंजे जागरूकता के नारे

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ नशा मुक्त भारत के समर्थन में नारे लगाए। “नशे को कहो ना-जीवन को हां” और “हम सबका एक ही नारा-नशामुक्त हो देश हमारा” जैसे नारों ने माहौल को पूरी तरह प्रेरणादायक बना दिया।

कॉलेज प्रशासन का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं होते, बल्कि युवाओं के मन में सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम बनते हैं। विद्यार्थियों ने भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लिया और समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

प्राचार्य डॉ. नागिया ने बताए नशे के दुष्परिणाम

प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. सुरेंद्र कुमार नागिया ने अपने संबोधन में कहा कि नशा आज समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि नशा धीरे-धीरे इंसान की सोचने-समझने की क्षमता को खत्म कर देता है और जीवन को अंधकार की ओर ले जाता है।

उन्होंने कहा कि कई युवा केवल दोस्तों के दबाव या फैशन के कारण नशे की शुरुआत करते हैं, लेकिन बाद में वही आदत उनकी जिंदगी बर्बाद कर देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे खुद भी नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करें।

डॉ. नागिया ने यह भी कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनना है। यदि युवा सही दिशा में आगे बढ़ेंगे तो समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होंगे।

वरिष्ठ प्राध्यापक गुरनाम सिंह मलिक का संदेश

कार्यक्रम में वरिष्ठ प्राध्यापक गुरनाम सिंह मलिक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा किसी भी समाज को अंदर से कमजोर कर देता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल, तकनीक और समाज सेवा में लगानी चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जो युवा अपने लक्ष्य पर फोकस करता है, वह कभी नशे जैसी बुरी आदतों का शिकार नहीं होता। उन्होंने कहा कि भारत को नशा मुक्त बनाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

गुरनाम सिंह मलिक ने विद्यार्थियों से यह भी कहा कि यदि वे अपने किसी दोस्त या परिचित को नशे की ओर बढ़ते देखें, तो उसे रोकने और समझाने की कोशिश करें। समाज तभी बदल सकता है जब हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे।

विद्यार्थियों को दिलाई गई नशा मुक्ति शपथ

कार्यक्रम के संयोजक शुभम शर्मा ने विद्यार्थियों को नशा मुक्ति शपथ दिलवाई। विद्यार्थियों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे स्वयं किसी प्रकार का नशा नहीं करेंगे और दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेंगे।

शपथ के दौरान छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई विद्यार्थियों ने कहा कि वे अपने गांव और मोहल्ले में भी लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करेंगे।

शुभम शर्मा ने कहा कि नशा मुक्त भारत केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि समाज का सामूहिक आंदोलन होना चाहिए। जब युवा आगे आएंगे, तभी देश को नशे की समस्या से मुक्त किया जा सकेगा।

शिक्षकों की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह

इस अवसर पर कॉलेज स्टाफ के कई सदस्य भी उपस्थित रहे। इनमें डॉ. देवेंद्र, डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. राकेश, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. गीता, डॉ. अंजू बाला और डॉ. अंकित राज प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का संदेश दिया। शिक्षकों ने कहा कि आज के समय में युवाओं को सही मार्गदर्शन की जरूरत है और शिक्षण संस्थान इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

क्यों बढ़ रही है नशे की समस्या?

विशेषज्ञों के अनुसार, युवाओं में बढ़ता तनाव, गलत संगति, सोशल मीडिया का प्रभाव और बेरोजगारी जैसी समस्याएं कई बार युवाओं को नशे की ओर धकेल देती हैं। यही कारण है कि स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।

करनाल के सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि परिवार, शिक्षण संस्थान और प्रशासन मिलकर काम करें, तो युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से बचाया जा सकता है।

युवाओं ने दिया सकारात्मक संदेश

कार्यक्रम के बाद कई विद्यार्थियों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें प्रेरित करते हैं। छात्रों ने कहा कि वे अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे।

कुछ विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि नशा छोड़ने वाले लोगों की कहानियां और जागरूकता अभियान समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। उनका मानना है कि यदि हर युवा जागरूक हो जाए तो देश को नशा मुक्त बनाना संभव है।

शिक्षण संस्थानों की भूमिका अहम

विशेषज्ञ मानते हैं कि कॉलेज और स्कूल केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि समाज निर्माण की प्रयोगशाला होते हैं। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।

राजकीय महाविद्यालय घरौंडा द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों के बीच सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी।

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