शहर में बड़ा खुलासा—10 हजार पीएनजी उपभोक्ताओं का कोई रिकॉर्ड नहीं! बिना आधार-पते के लगे मीटर, अब प्रशासन कराएगा डोर-टू-डोर जांच।
करनाल। शहर में गैस आपूर्ति व्यवस्था को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां पीएनजी कनेक्शन धारक लापता होने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) द्वारा शहर में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा देने के दौरान करीब 10 हजार उपभोक्ताओं को बिना किसी ठोस पहचान दस्तावेज—जैसे आधार कार्ड या पते के प्रमाण—के ही कनेक्शन जारी कर दिए गए। अब स्थिति यह है कि इन उपभोक्ताओं की पहचान करना मुश्किल हो गया है और उनका रिकॉर्ड अधूरा या गायब बताया जा रहा है।
इस मामले ने न केवल प्रशासन बल्कि आम जनता के बीच भी चिंता पैदा कर दी है। गैस जैसी संवेदनशील सेवा में इतनी बड़ी संख्या में बिना सत्यापन के कनेक्शन देना कई सवाल खड़े करता है—क्या यह लापरवाही थी या सिस्टम की खामी?
कैसे हुआ खुलासा?
सूत्रों के अनुसार, जब प्रशासन ने शहर में पीएनजी कनेक्शन की स्थिति का आकलन करना शुरू किया, तब यह सामने आया कि हजारों उपभोक्ताओं का डेटा अधूरा है। कई मामलों में उपभोक्ताओं के पास कोई वैध पहचान नहीं है, जबकि कुछ के पते भी स्पष्ट नहीं हैं।
डीएफएससी (जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक) मुकेश कुमार ने बताया कि यह स्थिति तब सामने आई जब विभाग ने गैस वितरण व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और इसे सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं।
अब होगा डोर-टू-डोर सर्वे
प्रशासन ने इस समस्या के समाधान के लिए शहर में बड़े स्तर पर डोर-टू-डोर सर्वे शुरू करने का निर्णय लिया है। इस सर्वे के तहत हर घर में जाकर यह जांच की जाएगी कि वहां पीएनजी कनेक्शन मौजूद है या नहीं, वह सक्रिय है या बंद, और उपभोक्ता की पहचान क्या है।
इस बार उपभोक्ताओं से न केवल आधार कार्ड बल्कि परिवार पहचान पत्र (Family ID) भी लिया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो।
क्या-क्या जांचा जाएगा?
सर्वे के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
- किस घर में पीएनजी कनेक्शन लगा है
- कौन-सा कनेक्शन सक्रिय है और कौन-सा बंद
- उपभोक्ता की पहचान और दस्तावेज
- क्या उपभोक्ता के पास एलपीजी कनेक्शन भी है
- तकनीकी कारणों से कनेक्शन चालू नहीं होने की स्थिति
तकनीकी मदद भी मिलेगी
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन उपभोक्ताओं के घरों में पीएनजी कनेक्शन तकनीकी कारणों से चालू नहीं हो पा रहा है, उनके लिए प्लंबर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी उपभोक्ता केवल तकनीकी समस्या के कारण इस सुविधा से वंचित न रहे।
एलपीजी कनेक्शन होगा बंद
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जिन उपभोक्ताओं के घरों में पीएनजी कनेक्शन सक्रिय हो जाएगा, उनसे एलपीजी कनेक्शन वापस ले लिया जाएगा। इसका उद्देश्य दोहरी गैस व्यवस्था को खत्म करना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
इस निर्णय से उन उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा जो अभी तक दोनों सुविधाओं का लाभ उठा रहे थे। प्रशासन का मानना है कि इससे गैस वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल
इस पूरे मामले ने गैस वितरण प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना पहचान के कनेक्शन देना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे सुरक्षा जोखिम भी बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गैस जैसी सेवा में हर उपभोक्ता की पहचान सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
क्या बोले अधिकारी?
डीएफएससी मुकेश कुमार ने कहा:
“हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। सर्वे के माध्यम से सभी उपभोक्ताओं की पहचान सुनिश्चित की जाएगी और भविष्य में इस तरह की गलती नहीं होने दी जाएगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि सर्वे के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
आम जनता की प्रतिक्रिया
इस खबर के सामने आने के बाद आम लोगों में भी चिंता देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि यदि उनके इलाके में भी बिना सत्यापन के कनेक्शन दिए गए हैं, तो यह सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकता है।
कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी कहा कि उन्हें पीएनजी कनेक्शन तो मिला, लेकिन उसे चालू कराने में तकनीकी समस्याएं आईं, जिनका समाधान नहीं हुआ।
व्यापक प्रभाव
यह मामला केवल करनाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य और देश के लिए एक चेतावनी है। यदि गैस वितरण कंपनियां इस तरह की लापरवाही करती हैं, तो इससे न केवल सेवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
प्रशासन की आगे की योजना
- सर्वे के बाद सभी उपभोक्ताओं का डेटा अपडेट किया जाएगा
- बिना दस्तावेज वाले कनेक्शन की जांच होगी
- दोहरी गैस व्यवस्था को खत्म किया जाएगा
- तकनीकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा
- भविष्य में सख्त नियम लागू किए जाएंगे
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