करनाल गैस सिलिंडर डिलीवरी मैसेज से मचा हड़कंप: बिना बुकिंग मोबाइल पर आया सिलिंडर डिलीवरी संदेश

करनाल गैस सिलिंडर डिलीवरी मैसेज से मचा हड़कंप: बिना बुकिंग मोबाइल पर आया सिलिंडर डिलीवरी संदेश
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क्या आपके मोबाइल पर भी बिना सिलिंडर बुक किए डिलीवरी का मैसेज आया है? करनाल में सामने आया ऐसा मामला, उपभोक्ताओं ने उठाए गंभीर सवाल।

बिना बुकिंग आए डिलीवरी के संदेश: करनाल में गैस सिलिंडर डिलीवरी मैसेज से उपभोक्ता परेशान

करनाल शहर और आसपास के इलाकों में इन दिनों करनाल गैस सिलिंडर डिलीवरी मैसेज को लेकर उपभोक्ताओं के बीच असमंजस और नाराजगी का माहौल बन गया है। कई उपभोक्ताओं का दावा है कि उन्होंने गैस सिलिंडर की बुकिंग ही नहीं करवाई, इसके बावजूद उनके मोबाइल फोन पर सिलिंडर डिलीवरी का मैसेज आ गया। इस मैसेज में इनवाइस नंबर, डिलीवरी की तारीख और समय तक दर्ज है।

इस तरह के संदेश मिलने के बाद लोगों को शक है कि कहीं उनकी सब्सिडी या गैस कोटा का गलत इस्तेमाल तो नहीं हो रहा। शहर ही नहीं बल्कि असंध हलके तक के कई लोगों ने ऐसे मैसेज मिलने की बात कही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वे एजेंसी से संपर्क करते हैं तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिलता।

मोबाइल पर आया डिलीवरी मैसेज, पर घर तक नहीं पहुंचा सिलिंडर

कई उपभोक्ताओं ने बताया कि उनके मोबाइल पर गैस सिलिंडर डिलीवरी का मैसेज आया लेकिन वास्तव में उनके घर तक सिलिंडर नहीं पहुंचा। इससे लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो गए हैं।

गौरतलब है कि गैस कंपनियों की तरफ से भेजे जाने वाले डिलीवरी मैसेज में आमतौर पर पूरी जानकारी दी जाती है, जैसे इनवाइस नंबर, डिलीवरी की तारीख, समय और एजेंसी का नाम। ऐसे में उपभोक्ता यह मान लेते हैं कि सिलिंडर उनके नाम से डिलीवर हो चुका है।

यही वजह है कि अब लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर उनके नाम से डिलीवरी दिखाकर सिलिंडर किसे दिया जा रहा है।

असंध क्षेत्र तक पहुंचे ऐसे मामले

यह समस्या केवल करनाल शहर तक सीमित नहीं है। असंध क्षेत्र के कई उपभोक्ताओं ने भी ऐसे संदेश मिलने की शिकायत की है। इससे यह मामला और गंभीर हो गया है क्योंकि अलग-अलग इलाकों में एक जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं।

लोगों का कहना है कि अगर तकनीकी कारणों से ऐसा हो रहा है तो गैस एजेंसियों को तुरंत इसे ठीक करना चाहिए, क्योंकि इससे उपभोक्ताओं का भरोसा प्रभावित हो रहा है।

एजेंसी से नहीं मिला संतोषजनक जवाब

असंध क्षेत्र के ललैन गांव निवासी भीम सिंह ने बताया कि उन्होंने गैस सिलिंडर की कोई बुकिंग नहीं करवाई थी। इसके बावजूद उनके मोबाइल पर सिलिंडर डिलीवरी का मैसेज आ गया।

भीम सिंह के अनुसार जब उन्होंने गैस एजेंसी से इस बारे में पूछा तो उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। एजेंसी संचालक ने केवल इतना कहा कि उनका सिलिंडर 45 दिन बाद मिलेगा।

उनका कहना है कि अगर उन्होंने बुकिंग ही नहीं करवाई तो फिर डिलीवरी का मैसेज कैसे आ गया। इससे उन्हें शक है कि कहीं उनके नाम पर गैस सिलिंडर का गलत इस्तेमाल तो नहीं हो रहा।

बुकिंग मेरी, सिलिंडर किसी और को

करनाल की शिव कॉलोनी गली नंबर पांच निवासी विवेक ने भी ऐसी ही समस्या बताई। विवेक ने बताया कि उन्होंने गैस सिलिंडर की बुकिंग करवाई थी, लेकिन उन्हें सिलिंडर की डिलीवरी नहीं मिली।

इसके बावजूद उनके मोबाइल पर मैसेज आ गया कि सिलिंडर डिलीवर हो चुका है। जब उन्होंने एजेंसी से संपर्क किया तो वहां से भी यही बताया गया कि उनके नाम से सिलिंडर डिलीवर हो चुका है।

विवेक का कहना है कि अगर सिलिंडर उन्हें नहीं मिला तो फिर वह किसे दिया गया। इस सवाल का जवाब अभी तक उन्हें नहीं मिला है।

उपभोक्ताओं में बढ़ी चिंता

लगातार ऐसे मामले सामने आने के बाद उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि अगर उनके नाम से गैस सिलिंडर की डिलीवरी दिखाई जा रही है तो इससे उनकी सब्सिडी और गैस कोटा पर भी असर पड़ सकता है।

कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी कहा कि अगर इस तरह की गड़बड़ी लंबे समय तक चलती रही तो लोगों का गैस वितरण व्यवस्था पर से भरोसा उठ सकता है।

प्रशासन से जांच की मांग

उपभोक्ताओं ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन को यह पता लगाना चाहिए कि आखिर बिना बुकिंग के डिलीवरी मैसेज क्यों आ रहे हैं और अगर किसी के नाम से सिलिंडर किसी अन्य व्यक्ति को दिया जा रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

लोगों का मानना है कि अगर समय रहते इस मामले की जांच नहीं हुई तो आगे चलकर यह बड़ा घोटाला भी साबित हो सकता है।

क्या कहते हैं अधिकारी

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी कप्तान सिंह का कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों से भी उपभोक्ताओं के मोबाइल पर ऐसे संदेश पहुंच जाते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सिलिंडर की वास्तविक डिलीवरी तभी मानी जाती है जब वह उपभोक्ता को वास्तव में मिल जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी उपभोक्ता की बुकिंग का सिलिंडर किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया जाता है तो वह इसकी शिकायत खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में दर्ज करवा सकता है। शिकायत मिलने पर विभाग तुरंत संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा।

तकनीकी गड़बड़ी या कोई और मामला?

हालांकि अधिकारियों ने इसे तकनीकी कारण बताया है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों के कारण उपभोक्ताओं की शंका पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

लोगों का कहना है कि अगर तकनीकी गड़बड़ी है तो उसे तुरंत ठीक किया जाना चाहिए और उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।

उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए

अगर किसी उपभोक्ता के मोबाइल पर बिना बुकिंग के गैस सिलिंडर डिलीवरी मैसेज आता है तो उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।

उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे तुरंत अपनी गैस एजेंसी से संपर्क करें और पूरी जानकारी लें। अगर वहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता तो खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।

इसके अलावा उपभोक्ता अपने गैस कनेक्शन की ऑनलाइन हिस्ट्री भी चेक कर सकते हैं ताकि यह पता चल सके कि उनके नाम से कब और कितने सिलिंडर की डिलीवरी दिखाई जा रही है।

डिजिटल सिस्टम में पारदर्शिता जरूरी

आज गैस वितरण प्रणाली पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है। बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक हर प्रक्रिया ऑनलाइन दर्ज होती है। ऐसे में अगर किसी उपभोक्ता के मोबाइल पर गलत गैस सिलिंडर डिलीवरी मैसेज मैसेज पहुंचता है तो यह डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गैस कंपनियों को अपने सिस्टम को और मजबूत बनाना होगा ताकि इस तरह की गड़बड़ियां न हों।

बढ़ते मामलों से उठे बड़े सवाल

करनाल और असंध क्षेत्र में सामने आए इन मामलों ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह केवल तकनीकी गड़बड़ी है या फिर कहीं न कहीं वितरण व्यवस्था में लापरवाही हो रही है।

जब तक इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, तब तक उपभोक्ताओं की चिंता बनी रहेगी।

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