अब एक गलती पूरे करियर पर भारी नहीं पड़ेगी… बोर्ड परीक्षा में छात्रों को मिलेगा दोबारा खुद को साबित करने का अवसर।
करनाल।
NEP 2020 के तहत अंक सुधार की दिशा में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का यह फैसला न केवल परीक्षा प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है, बल्कि लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए मानसिक दबाव कम करने वाला कदम भी साबित होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मंशा के अनुरूप बोर्ड ने माध्यमिक (10वीं) और वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) कक्षाओं के विद्यार्थियों को अब अंक सुधार के लिए दो अवसर देने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2025-26 से प्रभावी होगी।
अब तक की परीक्षा प्रणाली में एक बार परीक्षा देने के बाद छात्र अपने अंकों से संतुष्ट न होने पर सीमित विकल्पों के साथ आगे बढ़ने को मजबूर थे। लेकिन नई व्यवस्था में बोर्ड ने छात्रों को यह अधिकार दिया है कि वे अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए दो बार परीक्षा दे सकें और बेहतर प्रदर्शन वाले अंकों को ही अंतिम परिणाम में शामिल किया जाएगा।
कब होंगी परीक्षाएं, क्या है नया शेड्यूल
हरियाणा बोर्ड द्वारा जारी शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार—
- 12वीं कक्षा की मुख्य वार्षिक परीक्षा 25 फरवरी 2026 से
- 10वीं कक्षा की मुख्य वार्षिक परीक्षा 26 फरवरी 2026 से शुरू होगी
मुख्य परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद, छात्रों को जुलाई माह में दूसरी वार्षिक परीक्षा के रूप में अंक सुधार का अवसर मिलेगा। यह दूसरी परीक्षा पूरक या कंपार्टमेंट परीक्षा की तरह नहीं होगी, बल्कि इसे मुख्य परीक्षा का ही हिस्सा माना जाएगा।
पहली और दूसरी परीक्षा—एक ही मानी जाएंगी
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पहली और दूसरी वार्षिक परीक्षा को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही परीक्षा प्रणाली के अंतर्गत माना जाएगा।
- जिस परीक्षा में छात्र का प्रदर्शन बेहतर होगा,
- वही अंक अंतिम अंकपत्र (मार्कशीट) में जोड़े जाएंगे।
इससे छात्रों को बिना किसी जोखिम के दोबारा प्रयास करने का आत्मविश्वास मिलेगा।
प्रैक्टिकल परीक्षा को लेकर क्या होंगे नियम
नई व्यवस्था में प्रैक्टिकल परीक्षा को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं—
- यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में केवल प्रैक्टिकल में अनुपस्थित रहा है, तो वह दूसरी परीक्षा में सिर्फ प्रैक्टिकल दे सकता है।
- यदि छात्र लिखित और प्रैक्टिकल दोनों में अनुपस्थित रहा है, तो दूसरी परीक्षा में उसे दोनों देने होंगे।
इस नियम से विशेष रूप से वे छात्र लाभान्वित होंगे जो बीमारी, दुर्घटना या किसी अन्य अनिवार्य कारण से परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए।
अतिरिक्त विषय (Additional Subject) को लेकर सख्ती
बोर्ड ने अतिरिक्त विषयों को लेकर भी नियम स्पष्ट कर दिए हैं—
- जिन छात्रों ने पहली परीक्षा में अतिरिक्त विषय लिया है, वे दूसरी परीक्षा में अधिकतम तीन विषयों में ही शामिल हो सकेंगे।
- जिन छात्रों ने पहली परीक्षा में कोई अतिरिक्त विषय नहीं लिया, वे दूसरी परीक्षा में भी अतिरिक्त विषय नहीं ले सकेंगे।
यह नियम परीक्षा की गंभीरता बनाए रखने और अनावश्यक प्रयोग से बचने के लिए लागू किया गया है।
दूसरी परीक्षा सिर्फ संस्थागत छात्रों के लिए
हरियाणा बोर्ड के अनुसार दूसरी वार्षिक परीक्षा का लाभ—
- केवल संस्थागत (Regular) छात्रों को मिलेगा।
- वही छात्र पात्र होंगे जिन्होंने पहली वार्षिक परीक्षा दी हो।
प्राइवेट उम्मीदवारों के लिए फिलहाल इस व्यवस्था को लागू नहीं किया गया है।
री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन का विकल्प रहेगा जारी
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि—
- पहली वार्षिक परीक्षा के बाद
- पुनर्मूल्यांकन
- पुनः जांच
- उत्तर पुस्तिका की प्रति प्राप्त करने की सुविधा
पहले की तरह जारी रहेगी।
हालांकि दूसरी परीक्षा के बाद यह सुविधा सिर्फ उन्हीं विषयों तक सीमित रहेगी जिनकी परीक्षा दोबारा दी गई है।
UMC (नकल) वाले छात्रों पर सख्ती
बोर्ड ने परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए कड़ा रुख अपनाया है—
- जिन छात्रों पर पहली परीक्षा में UMC (Unfair Means Case) दर्ज होगा,
वे दूसरी वार्षिक परीक्षा नहीं दे सकेंगे।
हालांकि—
- जिन छात्रों का पेपर किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से रद्द हुआ है,
उन्हें दूसरी परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी।
कौन छात्र दे सकेंगे दूसरी परीक्षा
दूसरी वार्षिक परीक्षा में वही छात्र शामिल हो सकेंगे—
- जो पहली परीक्षा में फेल हुए हों
- जिनके कंपार्टमेंट आए हों
- जो अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हों
शर्तें स्पष्ट हैं—
- छात्र ने पहली परीक्षा में कम से कम एक मुख्य विषय पास किया हो।
- छात्र एक से तीन विषयों में ही दोबारा परीक्षा दे सकेगा।
- विषय बदले नहीं जा सकेंगे, वही विषय होंगे जिनमें पहली बार परीक्षा दी गई थी।
NEP 2020 की सोच के अनुरूप बड़ा बदलाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य—
- रटने की संस्कृति से बाहर आना
- छात्रों को बहु-अवसर देना
- परीक्षा के डर को कम करना
हरियाणा बोर्ड का यह फैसला इसी सोच को जमीन पर उतारता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे—
- छात्रों पर मानसिक दबाव कम होगा
- आत्मविश्वास बढ़ेगा
- ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी
अभिभावकों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
अभिभावकों ने इस फैसले को “छात्र हित में ऐतिहासिक कदम” बताया है। वहीं शिक्षकों का कहना है कि—
“अब एक खराब दिन या एक गलती बच्चे के पूरे भविष्य का फैसला नहीं करेगी।”
निष्कर्ष
हरियाणा बोर्ड द्वारा NEP 2020 के तहत अंक सुधार की यह व्यवस्था न केवल परीक्षा प्रणाली को अधिक मानवीय बनाती है, बल्कि छात्रों को सीखने और सुधार का वास्तविक अवसर भी देती है। आने वाले समय में यदि अन्य बोर्ड भी इस मॉडल को अपनाते हैं, तो भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक सकारात्मक क्रांति देखी जा सकती है।
