घरौंडा सफाई टेंडर संकट: खत्म हो रहे दोनों टेंडर, शहर की सफाई व्यवस्था पर खतरा

घरौंडा सफाई टेंडर संकट: खत्म हो रहे दोनों टेंडर, शहर की सफाई व्यवस्था पर खतरा
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“अगर समय रहते फैसला नहीं हुआ, तो क्या घरौंडा की सड़कों पर कचरे के ढेर बन जाएंगे?”

घरौंडा में समाप्त होने वाले हैं सफाई के दोनों टेंडर, शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर मंडराया संकट

घरौंडा।
घरौंडा सफाई टेंडर को लेकर शहर में एक बार फिर चिंता बढ़ती दिख रही है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सफाई टेंडर प्रक्रिया में किए जा रहे बदलावों का सीधा असर अब स्थानीय निकायों पर दिखाई देने लगा है। नगर पालिका घरौंडा में फिलहाल सफाई व्यवस्था के लिए लागू दोनों टेंडरों की अवधि समाप्ति की ओर है, जिससे आने वाले दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

अब तक नगर पालिकाओं में सफाई व्यवस्था के लिए एक वर्ष की अवधि का टेंडर जारी करने की परंपरा रही है, लेकिन सरकार अब इसे बदलकर सीधे पांच वर्ष की अवधि का टेंडर लागू करने की तैयारी में है। इस नीति परिवर्तन के चलते न केवल टेंडर प्रक्रिया लंबी हो गई है, बल्कि इसका असर जमीन पर दिखाई देने लगा है।

एक टेंडर खत्म, दूसरा अंतिम चरण में

नगर पालिका घरौंडा द्वारा शहर की सफाई व्यवस्था के लिए कुल दो टेंडर किए गए थे। इनमें से एक टेंडर की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी है, जबकि दूसरा टेंडर अगले माह समाप्त होने वाला है। ऐसे में यदि समय रहते नई प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो शहर में सफाई व्यवस्था चरमरा सकती है।

शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, बाजारों की सफाई, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता और नालियों की सफाई जैसे कार्य पूरी तरह इन्हीं टेंडरों पर निर्भर हैं। टेंडर समाप्त होने की स्थिति में न केवल सफाई कर्मियों की उपलब्धता प्रभावित होगी, बल्कि कचरा उठान और निस्तारण की व्यवस्था भी बाधित हो सकती है।

चेयरमैन ने बुलाई अहम बैठक

इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए शुक्रवार को नगर पालिका चेयरमैन हैप्पी लक गुप्ता ने अधिकारियों और पार्षदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। बैठक में नगर पालिका सचिव रवि प्रकाश शर्मा, सफाई शाखा से जुड़े अधिकारी और कई पार्षद मौजूद रहे।

बैठक में साफ तौर पर यह बात सामने आई कि यदि टेंडर प्रक्रिया में देरी होती है तो शहर की सफाई व्यवस्था को संभालना मुश्किल हो सकता है। पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों की स्थिति से चेयरमैन को अवगत कराया और बताया कि पहले से ही कई क्षेत्रों में सफाई को लेकर शिकायतें मिल रही हैं।

सरकार के नए नियम बने चुनौती

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सरकार की नई नीति के तहत अब पांच साल के लिए एक साथ टेंडर करना होगा। इस प्रक्रिया में तकनीकी दस्तावेज, वित्तीय शर्तें और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन जैसी कई औपचारिकताएं शामिल हैं, जिनमें समय लगता है।

नगर पालिका स्तर पर सभी दस्तावेज पूरे कर सरकार को भेजे जाएंगे, लेकिन अंतिम स्वीकृति और आगे की कार्रवाई उच्च स्तर से ही होगी। यही वजह है कि स्थानीय निकाय चाहकर भी त्वरित निर्णय नहीं ले पा रहा।

पार्षदों के सुझाव और चिंताएं

बैठक में पार्षदों ने सुझाव दिया कि जब तक नया टेंडर लागू नहीं हो जाता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि शहर की सफाई प्रभावित न हो। कुछ पार्षदों ने अस्थायी व्यवस्था के तहत सफाई कर्मियों को जारी रखने का प्रस्ताव रखा, वहीं कुछ ने आउटसोर्सिंग के अन्य विकल्पों पर विचार करने की बात कही।

पार्षदों का कहना था कि सफाई व्यवस्था सीधे आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। यदि कचरा समय पर नहीं उठेगा तो बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, खासकर बरसात के मौसम में।

चेयरमैन के निर्देश

चेयरमैन हैप्पी लक गुप्ता ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सफाई टेंडर से संबंधित सभी प्रक्रियाएं जल्द से जल्द पूरी कर प्रस्ताव सरकार को भेजा जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि टेंडर प्रक्रिया को तेज करवाने के लिए जल्द ही करनाल के जिला नगर निगम आयुक्त से मुलाकात की जाएगी।

चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि नगर पालिका की प्राथमिकता शहर की स्वच्छता है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी हालत में घरौंडा की सफाई व्यवस्था को ठप नहीं होने दिया जाएगा।

शहरवासियों की बढ़ती चिंता

टेंडरों की समाप्ति की खबर जैसे-जैसे आम लोगों तक पहुंच रही है, वैसे-वैसे शहरवासियों में भी चिंता बढ़ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले ही कई मोहल्लों में सफाई समय पर नहीं हो पा रही है। यदि टेंडर खत्म होने के बाद व्यवस्था और बिगड़ी तो हालात गंभीर हो सकते हैं।

व्यापारियों का कहना है कि बाजार क्षेत्रों में सफाई न होने से ग्राहकों पर भी गलत असर पड़ता है। वहीं स्कूलों और अस्पतालों के आसपास सफाई व्यवस्था बिगड़ने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकता है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

नगर पालिका प्रशासन के लिए यह स्थिति किसी चुनौती से कम नहीं है। एक ओर सरकार की नई नीति का पालन करना जरूरी है, तो दूसरी ओर शहर की रोजमर्रा की सफाई व्यवस्था को बनाए रखना भी उतना ही अहम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो नगर पालिका को अस्थायी उपायों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे खर्च भी बढ़ सकता है और व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

आगे क्या?

अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम और जिला प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं। यदि टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाती है तो राहत की सांस ली जा सकती है। लेकिन यदि इसमें देरी होती है तो घरौंडा की सफाई व्यवस्था एक बड़े संकट में फंस सकती है।

नगर पालिका के अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे को समझते हुए जल्द निर्णय लेगी, ताकि शहर की स्वच्छता व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।

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