भारत सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच केवल मल्टीनेशन टूर्नामेंट जैसे एशिया कप और आईसीसी इवेंट्स में ही होंगे। द्विपक्षीय सीरीज का कोई सवाल नहीं है। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता, तब तक खेलों में सामान्य संबंध संभव नहीं।
सरकार का दो टूक रुख
केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान की टीम भारत आने के लिए आमंत्रित नहीं होगी और भारतीय खिलाड़ी पाकिस्तान नहीं जाएंगे। हालांकि, एशिया कप और आईसीसी टूर्नामेंट में भारत हिस्सा लेगा, बशर्ते मैच किसी तटस्थ स्थान (Neutral Venue) पर हों।
खेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:
👉 “भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज का सवाल ही नहीं उठता।”
क्यों लिया गया यह फैसला?
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि खेलों पर भी असर डालता है।
- 2023 में भारत ने पाकिस्तान में होने वाले एशिया कप का बहिष्कार किया था।
- 2025 में होने वाली चैम्पियंस ट्रॉफी को लेकर भी भारत ने यही रुख अपनाया।
- हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद खेलों में पाकिस्तान से दूरी और बढ़ी।
इस घटना ने पूरे देश में भावनाएं भड़का दीं। पूर्व क्रिकेटरों और आम जनता दोनों ने मांग की कि भारत को पाकिस्तान से किसी भी स्तर पर क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए।
एशिया कप 2025 में भारत-पाकिस्तान भिड़ंत
इस बार एशिया कप 9 सितंबर से शुरू हो रहा है। भारत-पाकिस्तान का बहुप्रतीक्षित मुकाबला 14 सितंबर को खेला जाएगा। फाइनल मैच 29 सितंबर को है।
दिलचस्प बात यह है कि एशिया कप में भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत तीन बार तक हो सकती है –
- ग्रुप स्टेज में
- सुपर फोर में
- फाइनल में
यानी दर्शकों को क्रिकेट का रोमांच जरूर मिलेगा, लेकिन द्विपक्षीय सीरीज का इंतजार और लंबा होगा।
कब से नहीं हुए द्विपक्षीय मुकाबले?
भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी द्विपक्षीय सीरीज 2012-13 में खेली गई थी। उसके बाद से दोनों टीमें केवल एशिया कप, वर्ल्ड कप या आईसीसी टूर्नामेंट में ही भिड़ती रही हैं।
- 2008 मुंबई हमले के बाद रिश्ते काफी बिगड़ गए।
- 2012-13 में पाकिस्तान ने भारत दौरा किया था, लेकिन उसके बाद कोई सीरीज नहीं हुई।
- महिला क्रिकेट टीमों का भी यही हाल है।
भावनात्मक पृष्ठभूमि: आतंकवाद और खेल
भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान से आतंकवाद का खतरा बना रहेगा, तब तक सामान्य खेल संबंध संभव नहीं।
- 26/11 के मुंबई हमले से लेकर पुलवामा तक की घटनाओं ने जनता की भावनाओं को गहराई से चोट पहुंचाई है।
- हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले ने यह घाव फिर से ताजा कर दिया।
- ऐसे माहौल में द्विपक्षीय मैचों की कल्पना करना असंभव है।
भारत की स्पोर्ट्स पॉलिसी और पाकिस्तान
भारत की नई स्पोर्ट्स पॉलिसी साफ करती है कि –
- भारत अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए भरोसेमंद स्थल बनना चाहता है।
- विदेशी खिलाड़ियों, अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों को आसानी से वीजा मिलेगा।
- “मल्टी-एंट्री वीजा” की सुविधा भी दी जाएगी ताकि खिलाड़ी बार-बार आ-जा सकें।
लेकिन यह छूट द्विपक्षीय टूर्नामेंट्स के लिए पाकिस्तान को नहीं मिलेगी। केवल मल्टीनेशन इवेंट्स में वह हिस्सा ले सकता है।
पूर्व क्रिकेटरों और जनता की आवाज
कई पूर्व भारतीय क्रिकेटर कह चुके हैं कि भारत को पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी तरह का मैच नहीं खेलना चाहिए। उनका कहना है कि जब सीमा पर सैनिक शहीद हो रहे हैं, तब क्रिकेट की दोस्ती का कोई मतलब नहीं।
हालांकि, कुछ का यह भी मानना है कि क्रिकेट से लोगों के बीच संवाद का रास्ता खुल सकता है। लेकिन सरकार का रुख कड़ा है – पहले आतंकवाद पर रोक, फिर खेल संबंध।
भारत-पाकिस्तान मैच: रोमांच और राजनीति
भारत और पाकिस्तान का मुकाबला हमेशा हाई-वोल्टेज रहा है।
- दर्शकों की नजरें टीवी स्क्रीन पर टिकी रहती हैं।
- स्टेडियम खचाखच भर जाते हैं।
- स्पॉन्सर्स और विज्ञापनदाता करोड़ों खर्च करते हैं।
यही वजह है कि आईसीसी और एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) दोनों चाहते हैं कि भारत-पाकिस्तान भिड़ंत होती रहे। लेकिन यह केवल मल्टीनेशन टूर्नामेंट में ही संभव है।
क्रिकेट डिप्लोमेसी: इतिहास क्या कहता है?
- 1978: इंदिरा गांधी के समय भारत-पाक क्रिकेट दोबारा शुरू हुआ था।
- 1987: राजीव गांधी ने जनरल जिया-उल-हक को भारत बुलाया, इसे “क्रिकेट डिप्लोमेसी” कहा गया।
- 2004: अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में भारत ने पाकिस्तान का दौरा किया।
लेकिन 2008 के बाद रिश्ते लगातार बिगड़े हैं। अब हालात ऐसे हैं कि भारत केवल मल्टीनेशन टूर्नामेंट तक ही सीमित है।
क्रिकेट प्रेमियों को हालांकि निराशा होती है, लेकिन देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय भावना इससे ऊपर है।
आगे का रास्ता
भारत की नीति फिलहाल बहुत स्पष्ट है –
- द्विपक्षीय सीरीज नहीं होगी।
- केवल एशिया कप, वर्ल्ड कप जैसे मंचों पर ही भिड़ंत होगी।
- सुरक्षा और आतंकवाद रोकने को प्राथमिकता दी जाएगी।
क्रिकेट प्रेमियों को हालांकि निराशा होती है, लेकिन देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय भावना इससे ऊपर है।
