मुख्यमंत्री उड़नदस्ते और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई से हड़कंप, NH-44 पर ढाबे में अवैध शराब परोसने पर केस दर्ज
करनाल। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 स्थित करनाल जिले के नीलोखेड़ी क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री उड़नदस्ते और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने एक ढाबे पर छापा मारकर वहां अवैध रूप से संचालित शराब पार्टी का भंडाफोड़ किया। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के निरीक्षक अविश कुमार और आबकारी निरीक्षक नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में की गई, जहां ढाबे के मालिक के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है।
ढाबे पर छापा: अवैध शराब पार्टी का भंडाफोड़
घटना शुक्रवार देर शाम की बताई जा रही है जब नीलोखेड़ी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर स्थित ‘बुलबुल ढाबा’ में भारी चहल-पहल देखी गई। सूचना के आधार पर आबकारी विभाग और मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान पाया गया कि ढाबे के चार विशेष केबिनों में 18 से 20 लोग शराब का सेवन कर रहे थे।
ढाबे पर मौजूद युवक की पहचान गांव अरजेड़ी निवासी अजय कुमार के रूप में हुई, जो खुद को ढाबे का मालिक बता रहा था। पूछताछ में अजय किसी भी प्रकार की अनुमति या लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका जिससे यह स्पष्ट हो गया कि शराब पार्टी पूरी तरह से गैरकानूनी तरीके से आयोजित की गई थी।
पुलिस को सौंपा गया मामला, जब्त किया गया सामान
आबकारी निरीक्षक नरेंद्र कुमार ने थाना बुटाना के प्रभारी को सूचित कर ढाबा मालिक को तुरंत हिरासत में लेने का अनुरोध किया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने ढाबे में मौजूद सभी शराब से संबंधित सामग्री — जैसे शराब की बोतलें, गिलास, पानी की बोतलें, मेज-कुर्सियां — को कब्जे में ले लिया।
ढाबा मालिक पर आरोप है कि उसने न केवल आबकारी अधिनियम का उल्लंघन किया बल्कि सार्वजनिक स्थान पर शराब परोसने जैसे अपराध को अंजाम दिया, जिससे कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। साथ ही, यह भी सामने आया है कि ढाबा राष्ट्रीय राजमार्ग से मात्र 25 मीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि शराब की बिक्री के लिए नियमानुसार हाईवे से कम से कम 500 मीटर की दूरी अनिवार्य है।
कानून के स्पष्ट उल्लंघन का मामला
आबकारी अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक स्थल या संस्थान को शराब बेचने या परोसने के लिए सक्षम प्राधिकरण से लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है। साथ ही, हाईवे के पास स्थित प्रतिष्ठानों में शराब की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है। इस ढाबे पर की गई कार्रवाई इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह मामला न केवल गैरकानूनी गतिविधि का है, बल्कि यह नागरिकों की सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों से जुड़ा हुआ है।
छापेमारी में सामने आया शराब माफिया का नया तरीका?
सूत्रों के अनुसार, यह ढाबा लंबे समय से ऐसी गतिविधियों का अड्डा बना हुआ था, जहां भीतर केबिन सिस्टम में चोरी-छिपे शराब परोसी जाती थी। स्थानीय प्रशासन की आँखों में धूल झोंककर यहां बिना लाइसेंस के नियमित तौर पर शराब परोसी जाती थी। हालांकि किसी बड़े नेटवर्क की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इस घटना से यह सवाल जरूर उठता है कि क्या यह किसी बड़े शराब माफिया नेटवर्क की कड़ी हो सकती है?
स्थानीय प्रशासन की सक्रियता पर भी सवाल
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की सतर्कता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर यह ढाबा मुख्य हाईवे पर स्थित था, फिर भी इस पर महीनों से शराब परोसी जा रही थी और किसी भी विभाग की नजर में यह बात नहीं आई। यह दर्शाता है कि या तो संबंधित अधिकारियों की लापरवाही थी या फिर इसमें किसी स्तर पर सांठगांठ हो सकती है।
ढाबा मालिक के खिलाफ एफआईआर, जांच जारी
थाना बुटाना पुलिस ने ढाबा मालिक अजय कुमार के खिलाफ संबंधित धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वहां मौजूद अन्य लोगों में से कौन-कौन नियमित ग्राहक थे और क्या किसी ने इस गैरकानूनी गतिविधि की शिकायत की थी।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह ढाबा देर रात तक खुला रहता था और वहां कई बार संदिग्ध गतिविधियां होती देखी गई थीं। हालांकि किसी ने खुलकर शिकायत नहीं की क्योंकि उन्हें प्रशासन की निष्क्रियता पर विश्वास नहीं था। अब जब मुख्यमंत्री उड़नदस्ते और आबकारी विभाग ने खुद कार्रवाई की है तो लोगों में थोड़ी राहत जरूर महसूस हो रही है।
राजनीतिक हलचल भी संभव
इस घटना के बाद संभावना जताई जा रही है कि यह मामला राजनीतिक रंग भी ले सकता है, क्योंकि ढाबा मालिक के कुछ स्थानीय नेताओं से संबंध होने की बातें सामने आ रही हैं। अगर जांच निष्पक्ष रूप से की गई तो और भी कई बड़े नाम इस अवैध शराब कनेक्शन में सामने आ सकते हैं।
अधिकारियों का क्या कहना है?
आबकारी निरीक्षक नरेंद्र कुमार ने कहा, “हमने इस छापेमारी के दौरान साफ देखा कि ढाबे में शराब पिलाई जा रही थी, वह भी बिना किसी वैध लाइसेंस या परमिट के। ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है और आगे भी इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी।”
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के अधिकारी अविश कुमार ने बताया कि प्रदेश भर में इस प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा, “हमारी टीम लगातार गुप्त सूचनाओं के आधार पर काम कर रही है। जहां कहीं भी आबकारी नीति का उल्लंघन होगा, वहां सख्त कार्रवाई होगी।”
निष्कर्ष
करनाल के इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि हाईवे से सटे ढाबों में गैरकानूनी गतिविधियां किस हद तक चल रही हैं। हालांकि समय पर कार्रवाई ने प्रशासनिक सतर्कता का परिचय दिया है, परंतु इससे यह भी साफ है कि नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम शराब परोसने जैसे अपराध आज भी प्रशासन की आंखों के सामने घटित हो रहे हैं। अब देखना यह है कि पुलिस की जांच इस पूरे नेटवर्क का कितना बड़ा चेहरा उजागर कर पाएगी।
