एग्जिट पोल में गठबंधन की ताकत: अकेले लड़ने वाले दलों को नुकसान

एग्जिट पोल में गठबंधन की ताकत: अकेले लड़ने वाले दलों को नुकसान
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एग्जिट पोल के नतीजे स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को उन इलाकों में अधिक लाभ मिल रहा है जहां उसका मुकाबला अकेले चुनाव लड़ने वाले दलों से है। वहीं, जहां बीजेपी का सामना गठबंधन से हो रहा है, वहां पार्टी को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आजतक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में देखा जा रहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में कोई भी दल अगर अकेले चुनाव लड़ता है, तो उसे नुकसान उठाना पड़ता है। यह बात विशेष रूप से क्षेत्रीय पार्टियों के लिए सच साबित हो रही है, लेकिन बड़े और राष्ट्रीय दल भी इससे अछूते नहीं हैं।

बीजेपी को उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में कोई बड़ा नुकसान होता नहीं दिख रहा है। पार्टी देश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में भी बढ़त बनाती दिख रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इन इलाकों में कई क्षेत्रीय पार्टियों ने अपने बूते पर चुनाव लड़ना बेहतर समझा, जो उनके लिए घातक साबित हो रहा है।

उत्तर प्रदेश में बीएसपी को नुकसान और बीजेपी को फायदा

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने किसी भी दल के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया था। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा था कि गठबंधन से बीएसपी को नुकसान होता है। पर 2019 में यूपी में बहुजन समाज पार्टी को करीब 10 सीटें मिली थीं क्योंकि पार्टी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।

इस बार आजतक-एक्सिस माई इंडिया का एग्जिट पोल बता रहा है कि उत्तर प्रदेश में बीएसपी को ज़ीरो से एक सीट मिलती दिख रही है। वहीं, कांग्रेस को गठबंधन करने का फायदा मिलता दिख रहा है। 2019 में एक सीट से बढ़कर पार्टी तीन सीट तक पहुंच सकती है। समाजवादी पार्टी अपने पिछले प्रदर्शन को दोहरा सकती है या उससे कुछ बढ़ सकती है। उत्तर प्रदेश में बीजेपी के साथ आए सभी दलों को फायदा होता दिख रहा है।

बंगाल और ओडिशा में टीएमसी और बीजेडी को नुकसान

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन से दूरी बनाने की जो गलती की थी, वह चुनाव परिणाम आने के बाद पश्चाताप करती नजर आ सकती हैं। उन्हें पिछले बार मिली सीटों से कम सीटें मिलती नजर आ रही हैं। बीजेपी को 26 से 31 सीट मिलती दिख रही है।

ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजेडी) ने भी अकेले चुनाव लड़ने का नुकसान उठाया है। यहां बीजेपी क्लीन स्वीप जैसा कर रही है और करीब 18 से 21 सीटें लेती हुई नजर आ रही है। बीजेडी को ज़ीरो से दो सीट ही मिलती दिख रही है। आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, तेलंगाना में भारतीय राष्ट्र समिति और केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) केवल इसलिए ही नुकसान में दिख रही हैं क्योंकि ये पार्टियां किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं कर सकीं। वाईएसआर को दो से चार सीट मिलती दिख रही है। आंध्र में तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) और बीजेपी को बंपर फायदा हो रहा है।

हरियाणा और महाराष्ट्र में गठबंधन के चलते बीजेपी को नुकसान

आजतक-एक्सिस माई इंडिया का एग्जिट पोल बता रहा है कि 2019 के चुनाव की तुलना में बीजेपी को महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान, कर्नाटक, झारखंड और हरियाणा में कम से कम 33 सीटों का नुकसान होगा। महाराष्ट्र में बीजेपी का मुकाबला इंडिया गठबंधन में एकजुट हुए दलों से हो रहा है। शरद पवार की एनसीपी, उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इसी वजह से बीजेपी को फायदा नहीं हो रहा है।

हरियाणा में कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी (AAP) के गठबंधन से बीजेपी कमजोर होती नजर आ रही है। यही हाल झारखंड में है। यहां कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) मिलकर बीजेपी के लिए मैदान खाली नहीं छोड़ रहे हैं।

तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में बीजेपी को फायदा

आजतक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के अनुसार बीजेपी का वोट शेयर तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में दोहरे अंक में पहुंच रहा है। इसके पीछे स्पष्ट दिखाई दे रही है गठबंधन की ताकत। पंजाब में विपक्ष एकजुट होकर चुनाव नहीं लड़ा तो बीजेपी को वहां कुछ फायदा होता नजर आ रहा है। बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ रहा है।

आंध्र प्रदेश में जगन मोहन अकेले चुनाव लड़े, बीजेपी और टीडीपी एक साथ थीं, इसलिए जगन मोहन को नुकसान हो रहा है। केरल में एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाली युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच सीधी लड़ाई से बीजेपी को अपना वोट प्रतिशत बढ़ाने का मौका मिल गया है और बीजेपी को दो से तीन सीटें भी मिलती दिख रही हैं।

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