लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने इंडिया टुडे ग्रुप के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल से विशेष बातचीत की। इस इंटरव्यू में चिराग ने चुनावी तैयारियों, बिहार में एनडीए की भूमिका, और पार्टी के भविष्य पर खुलकर बात की। चिराग ने दावा किया कि इस बार चुनाव में बिहार में एनडीए 40 की 40 सीटें जीतेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी भी दूसरी पार्टी में विलय नहीं करेगी, क्योंकि यह पार्टी उनके पिता की मेहनत का परिणाम है।
चुनाव में एनडीए की भूमिका
चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में एनडीए का प्रदर्शन इस बार और भी बेहतर रहेगा। उन्होंने कहा कि 2019 में तीन दल मिलकर चुनाव लड़े थे और 40 में से 39 सीटें जीती थीं। इस बार पांच दल मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। चिराग ने बताया कि जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी, जो पहले विपक्ष के साथ थीं, अब एनडीए के साथ हैं। इस गठबंधन की मजबूती पर चिराग को पूरा विश्वास है और उनका मानना है कि इस बार 40 की 40 सीटें एनडीए जीतेगी।
अकेले चुनाव लड़ने का अनुभव
चिराग ने बताया कि यह पहला चुनाव है जब वे अकेले मैदान में हैं। पहले उनके पिता उनके साथ होते थे और उनके अनुभव का लाभ मिलता था। उन्होंने कहा कि पिता की कमी जरूर महसूस होती है, लेकिन उनके दिशा-निर्देश आज भी उनकी मदद कर रहे हैं। चिराग को उम्मीद है कि वे अपने प्रदर्शन को दोहराने में सफल रहेंगे।
पार्टी विलय के प्रस्ताव पर चिराग की प्रतिक्रिया
बीजेपी की ओर से पार्टी विलय के प्रस्ताव पर चिराग ने स्पष्ट किया कि उन्हें ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। अगर प्रस्ताव आता भी है, तो भी वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “यह मेरी पार्टी है, मेरे पिता के खून-पसीने से बनी है। ऐसे में किसी भी पार्टी के साथ विलय करने का सवाल ही नहीं उठता।”
चुनाव में पांच दलों का गठबंधन
चिराग ने बताया कि इस बार एनडीए में पांच दल मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इसमें दो नई पार्टियां शामिल हैं जो पहले विपक्ष के साथ थीं। उन्होंने कहा कि इस गठबंधन से एनडीए पहले से ज्यादा मजबूत हुआ है और उन्हें पूरा विश्वास है कि इस बार भी एनडीए सभी सीटें जीतेगी।
मांसाहार पर चिराग की राय
सावन और नवरात्र में मांसाहार पर चिराग ने कहा, “हम लोग आस्तिक हैं और सावन, नवरात्र में मांस नहीं खाते हैं। जो लोग पूजा-पाठ करते हैं, वे भी इस समय मांसाहार से बचते हैं। मैंने भी पूरी तरह से नॉनवेज छोड़ रखा है। जिसे जो खाना है, वो खाए, लेकिन इसका दिखावा ना करें।”
श्रेय लेने की होड़ पर चिराग की टिप्पणी
चिराग ने कहा कि जनता जानती है कि किसने काम किया है। कुछ लोग सिर्फ श्रेय लेने की होड़ में हैं। जनता चुनाव में बताएगी कि किसने वास्तव में काम किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को तीसरी बार जिताने के लिए वे सब साथ हैं और अब नीतीश कुमार से भी अच्छी बातचीत हो रही है।
मोदी सरकार की योजनाओं की सफलता
चिराग ने बताया कि मोदी सरकार-3.0 बनने पर विकास और गरीब कल्याण की योजनाओं को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि एंटी इंकंबेंसी नहीं, बल्कि प्रो-इंकंबेंसी नजर आ रही है। पीएम मोदी की विभिन्न योजनाओं का लाभ ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला है। उज्ज्वला योजना, आयुष्मान योजना और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए चिराग ने कहा कि ये सभी योजनाएं धरातल पर पहुंची हैं और जनता का समर्थन मिल रहा है।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना
चिराग ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष ने सिर्फ एक बार बिहार आना जरूरी समझा है। इन लोगों के लिए बिहार मायने नहीं रखता है और इसलिए बिहारियों के लिए भी ये मायने नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार का कैंपेन कुछ ही लोग मिलकर कर रहे हैं और इससे पता चलता है कि विपक्ष कितना कमजोर है।
तेजस्वी यादव पर टिप्पणी
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की ज्यादा रैलियों और घायल होने के सवाल पर चिराग ने कहा, “मैं सबसे पहले उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। वे युवा हैं और फिटनेस पर ध्यान देना चाहिए। आप देखिए, वे अकेले ही प्रचार कर रहे हैं। इनका गठबंधन कहां है? विपक्ष को 2014 और 2019 में बुरी हार मिली थी और अब इससे भी बुरी हार मिलेगी।”
पार्टी और परिवार में मतभेद
चिराग ने बताया कि पार्टी और परिवार में मतभेद आए, लेकिन इसमें दूसरों को दोष नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा, “मेरी शिकायत किसी और से नहीं है, शिकायत मेरी अपनों से ही है। हमारी लड़ाई खुद के एशो-आराम के लिए नहीं है, बल्कि बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट के लिए है।”
इस विशेष बातचीत में चिराग पासवान ने अपने विचार और चुनावी रणनीति को स्पष्ट किया। उन्होंने अपने पिता की पार्टी की विरासत को बनाए रखने और बिहार के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। चुनाव में एनडीए की सफलता पर विश्वास जताते हुए चिराग ने बिहार की जनता से अपील की कि वे एनडीए को समर्थन दें और विकास की राह पर आगे बढ़ें।
