कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बीच जातीय जनगणना के मुद्दे पर जोरदार बहस हो गई। राहुल गांधी ने सदन में आरोप लगाया कि अनुराग ठाकुर ने उन्हें गाली दी और उनकी बेइज्जती की है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अनुराग ठाकुर से माफी नहीं चाहिए।
बहस की शुरुआत
सदन में बहस के दौरान राहुल गांधी और अनुराग ठाकुर के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस दौरान अखिलेश यादव ने भी राहुल गांधी का समर्थन किया और सत्ता पक्ष के नेताओं को आड़े हाथों लिया। सदन का माहौल बेहद हंगामेदार हो गया।
बजट पर चर्चा के दौरान विवाद
संसद का मानसून सत्र चल रहा है जिसमें बजट पर चर्चा हो रही थी। चर्चा के दौरान अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में हुए घोटालों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “मैं पूछना चाहता हूँ, हलवा किसे मिला। कुछ लोग ओबीसी की बात करते हैं, इनके लिए ओबीसी का मतलब है ‘ऑनली फॉर ब्रदर-इन-लॉ कमीशन। मैंने कहा था, जिसको जाति का पता नहीं, वो गणना की बात करता है। मैंने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन जवाब देने कौन खड़े हो गए।”
असत्य के पैर नहीं होते: अनुराग ठाकुर
अनुराग ठाकुर ने आगे कहा, “असत्य के पैर नहीं होते और यह कांग्रेस पार्टी के कंधे पर सवारी करता है। जैसे मदारी के कंधे पर बंदर होता है, राहुल गांधी के कंधे पर असत्य का बंडल होता है।” इन टिप्पणियों के बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और स्पीकर ने राहुल गांधी को अनुराग ठाकुर के जवाब देने के लिए अनुमति दी।
राहुल गांधी का आरोप
राहुल गांधी ने खड़े होकर आरोप लगाया कि अनुराग ठाकुर ने उन्हें गाली दी है और उनकी बेइज्जती की है। उन्होंने कहा, “मुझे इनसे माफी भी नहीं चाहिए।” राहुल गांधी ने अनुराग ठाकुर पर निशाना साधते हुए कहा कि, “उन्हें पता होना चाहिए कि LoP का फुल फॉर्म लीडर ऑफ अपोजिशन होता है, लीडर ऑफ प्रोपेगैंडा नहीं। कांग्रेस पार्टी ने बहुत भ्रष्टाचार किया है।”
दलितों की बात करने वाला गाली खाता है: राहुल गांधी
अनुराग ठाकुर की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने महाभारत का जिक्र किया और कहा, “स्पीकर सर, जो भी दलितों की बात उठाता उसे गाली खानी ही पड़ती है। मैं ये सब गालियां खुशी से खाऊंगा। महाभारत की बात हुई तो अर्जुन को सिर्फ मच्छी की आंख दिख रही थी, तो हमें जातीय जनगणना चाहिए, वह हम करा के रहेंगे। इसके पीछे चाहे मुझे कितनी भी गाली दी जाए।”
अखिलेश यादव का समर्थन
राहुल गांधी के इस जवाबी हमले के बाद, जब सदन में फिर से हंगामा बढ़ा तो सभापति जगदंबिका पाल ने सभी से शांत रहने के लिए कहा। इसी दौरान अखिलेश यादव अपनी सीट से उठ खड़े हुए और उन्होंने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए केंद्र व सत्ता पक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “सदन में किसी की जाति कैसे पूछी जा सकती है?” इस पर सभापति पाल ने कहा कि, सदन में कोई किसी की जाति नहीं पूछेगा।
जातीय जनगणना का मुद्दा
जातीय जनगणना का मुद्दा हाल के दिनों में काफी विवादास्पद हो गया है। कई विपक्षी दल इसे लागू करने की मांग कर रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष इससे बचने का प्रयास कर रहा है। राहुल गांधी और अनुराग ठाकुर के बीच हुई बहस इसी मुद्दे पर केंद्रित थी।
जातीय जनगणना का महत्व
जातीय जनगणना को लेकर विपक्ष का कहना है कि यह समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति को समझने और उनके लिए नीतियाँ बनाने में मदद करेगा। वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि जातीय जनगणना से सामाजिक ताने-बाने को नुकसान हो सकता है और इससे जातिवाद को बढ़ावा मिल सकता है।
राहुल गांधी की मांग
राहुल गांधी ने जातीय जनगणना की मांग को लेकर कहा कि यह समाज के कमजोर वर्गों की स्थिति को जानने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि, “हम जातीय जनगणना कराएंगे चाहे मुझे इसके लिए कितनी भी गाली दी जाए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जातीय जनगणना से ही समाज के हाशिये पर खड़े लोगों की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा और उनके लिए बेहतर नीतियाँ बनाई जा सकेंगी।
अनुराग ठाकुर का विरोध
अनुराग ठाकुर ने जातीय जनगणना का विरोध करते हुए कहा कि इससे समाज में विभाजन और जातिवाद को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि, “कांग्रेस पार्टी ने हमेशा समाज को विभाजित करने की राजनीति की है। जातीय जनगणना से देश को सिर्फ नुकसान होगा।”
जातीय जनगणना पर राजनीतिक दलों की राय
जातीय जनगणना को लेकर राजनीतिक दलों में मतभेद हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल जैसे विपक्षी दल इसकी मांग कर रहे हैं। वहीं, भाजपा और उसके सहयोगी दल इससे बच रहे हैं। जातीय जनगणना को लेकर यह बहस आगामी चुनावों में भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।
जातीय जनगणना का इतिहास
भारत में जातीय जनगणना का इतिहास काफी पुराना है। आखिरी बार इसे ब्रिटिश शासन के दौरान 1931 में किया गया था। इसके बाद से इसे लेकर कई बार मांग उठी, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। जातीय जनगणना को लेकर कई बार राजनीतिक दलों के बीच विवाद भी हुआ है।
जातीय जनगणना और आरक्षण
जातीय जनगणना का मुद्दा आरक्षण के साथ भी जुड़ा हुआ है। आरक्षण को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं। जातीय जनगणना से आरक्षण की नीतियों पर भी असर पड़ सकता है। इसके तहत जातियों की वास्तविक स्थिति को जानने के बाद आरक्षण की नीतियों में बदलाव किया जा सकता है।
जातीय जनगणना पर विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि जातीय जनगणना से समाज की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा। इससे नीतियाँ बनाने में मदद मिलेगी और समाज के कमजोर वर्गों की स्थिति को सुधारने के लिए बेहतर कदम उठाए जा सकेंगे। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे समाज में विभाजन और जातिवाद को बढ़ावा मिल सकता है।
संसद का मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र चल रहा है और इसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है। बजट पर चर्चा के दौरान जातीय जनगणना का मुद्दा भी उठाया गया। इस दौरान राहुल गांधी और अनुराग ठाकुर के बीच तीखी नोकझोंक हुई। सदन में माहौल काफी हंगामेदार हो गया और विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर कई आरोप लगाए।
राहुल गांधी और अनुराग ठाकुर की बहस
राहुल गांधी और अनुराग ठाकुर के बीच हुई बहस ने संसद में हंगामे का माहौल बना दिया। दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अनुराग ठाकुर ने उन्हें गाली दी और उनकी बेइज्जती की। वहीं, अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा समाज को विभाजित करने की राजनीति की है।
जातीय जनगणना की मांग
जातीय जनगणना की मांग को लेकर विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि जातीय जनगणना जरूरी है ताकि समाज के कमजोर वर्गों की स्थिति का पता चल सके। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें इसके लिए कितनी भी गाली दी जाए, वे जातीय जनगणना कराके रहेंगे।
जातीय जनगणना पर अखिलेश यादव का समर्थन
राहुल गांधी की मांग का समर्थन करते हुए अखिलेश यादव ने भी जातीय जनगणना की वकालत की। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों की स्थिति को सुधारने के लिए जातीय जनगणना जरूरी है। उन्होंने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सदन में किसी की जाति कैसे पूछी जा सकती है।
निष्कर्ष
जातीय जनगणना का मुद्दा हाल के दिनों में राजनीतिक दलों के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है। संसद में राहुल गांधी और अनुराग ठाकुर के बीच हुई बहस ने इस मुद्दे को और गरम कर दिया है। जातीय जनगणना को लेकर राजनीतिक दलों में मतभेद हैं और यह मुद्दा आगामी चुनावों में भी महत्वपूर्ण हो सकता है। जातीय जनगणना की मांग को लेकर विपक्ष सत्ता पक्ष पर दबाव बना रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इससे बचने का प्रयास कर रहा है।
