लखनऊ की नीट छात्रा आयुषी पटेल ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने एनटीए पर उनके रिजल्ट को रोकने और फटी हुई ओएमआर शीट भेजने का आरोप लगाया था। हालाँकि, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एनटीए द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की जांच करने के बाद पाया कि आयुषी ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर याचिका दाखिल की थी और इस कारण उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया।
याचिका में क्या थे आरोप?
आयुषी पटेल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि एनटीए ने उन्हें फटी हुई ओएमआर शीट भेजी और उनका रिजल्ट भी जारी नहीं किया गया। इसके जवाब में कोर्ट ने एनटीए को सभी संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा। जब एनटीए ने मूल दस्तावेज प्रस्तुत किए, तो यह स्पष्ट हो गया कि आयुषी ने गलत दस्तावेजों के आधार पर याचिका दायर की थी। आयुषी ने दावा किया था कि उन्होंने नीट परीक्षा में 720 में से 715 अंक हासिल किए हैं, लेकिन एनटीए द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, उनके अंक 355 ही थे।
पूरा मामला क्या था?
लखनऊ की रहने वाली आयुषी पटेल ने आरोप लगाया कि एनटीए ने पहले उनका रिजल्ट रोक लिया था। जब उन्होंने एनटीए को ईमेल किया, तो एनटीए ने जवाब में उन्हें फटी हुई ओएमआर शीट मेल कर दी। इसके बाद आयुषी ने इस मामले को लेकर एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया, जो तेजी से वायरल हो गया। मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया, जब कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इस पर ट्वीट किया। एनटीए ने आयुषी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी ओर से कोई भी ऐसा मेल नहीं भेजा गया जिसमें फटी ओएमआर शीट की फोटो हो।
गलत एप्लीकेशन नंबर से जारी हुआ था रिजल्ट
मामले की जांच के दौरान यह सामने आया कि एनटीए ने गलती से आयुषी पटेल का रिजल्ट गलत एप्लीकेशन नंबर पर अपलोड कर दिया था। आयुषी के एडमिट कार्ड पर उनका एप्लीकेशन नंबर 240411840741 था, लेकिन जब गलत एप्लीकेशन नंबर 240411340741 डाला गया, तो उसका रिजल्ट खुल गया। सही एप्लीकेशन नंबर से आयुषी के 355 अंक ही थे, जबकि उन्होंने दावा किया था कि उनके 715 अंक हैं।
हाईकोर्ट का निर्णय
हाईकोर्ट ने एनटीए द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को देखने के बाद यह निर्णय लिया कि आयुषी पटेल ने गलत और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर याचिका दायर की थी। इस प्रकार, कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर याचिका दायर करना न्यायालय के साथ धोखाधड़ी है और इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
निष्कर्ष
लखनऊ की नीट छात्रा आयुषी पटेल की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है, क्योंकि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर एनटीए पर झूठे आरोप लगाए थे। इस मामले ने एक बार फिर से यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कानूनी प्रक्रिया में ईमानदारी और सत्यता का विशेष महत्व है और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग गंभीर परिणाम ला सकता है।
