हरियाणा रोडवेज हड़ताल 9 जुलाई: सभी बसें रहेंगी बंद, कर्मचारियों की 12 प्रमुख मांगें

हरियाणा रोडवेज हड़ताल 9 जुलाई: सभी बसें रहेंगी बंद, कर्मचारियों की 12 प्रमुख मांगें
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हरियाणा रोडवेज हड़ताल 9 जुलाई को, सभी बसें रहेंगी बंद: कर्मचारी संघ का बड़ा ऐलान

करनाल, संवाद न्यूज एजेंसी।
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि हरियाणा रोडवेज हड़ताल 9 जुलाई को पूरे राज्यभर में प्रभावी रहेगी और इस दिन रोडवेज की सभी बसें बंद रहेंगी। इस निर्णय से आमजन की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ सकता है, खासकर उन यात्रियों पर जो प्रतिदिन रोडवेज बसों पर निर्भर रहते हैं।

यह निर्णय शनिवार को सर्व कर्मचारी संघ से जुड़ी यूनियन की करनाल में हुई बैठक में लिया गया, जहां प्रदेश के वरिष्ठ कर्मचारी नेता रमेश श्योकंद और चंद्रभान ने बताया कि रोडवेज कर्मचारी राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होंगे।

क्यों हो रही है हड़ताल हरियाणा रोडवेज हड़ताल 9 जुलाई को?

चंद्रभान ने बताया कि हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की एकजुटता और संघर्ष का कारण सरकार की वादाखिलाफी है। कर्मचारियों की 12 प्रमुख मांगों पर सरकार पहले ही सहमति दे चुकी थी, लेकिन आज तक किसी एक भी मांग पर अमल नहीं हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा कि कई बार अधिकारियों और कर्मचारियों के साझा मोर्चा ने सरकार से बातचीत की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। यही कारण है कि अब कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट चुका है।

बैठक में शामिल हुए ये प्रमुख पदाधिकारी

  • रमेश श्योकंद (वरिष्ठ नेता, यूनियन)
  • चंद्रभान (प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधि)
  • गणेश कुमार (सचिव)
  • सुमेरचंद (उपप्रधान)
  • नरेश कुमार (कोषाध्यक्ष)
  • मनोज कुमार (महासंघ प्रधान)
  • कृपाल सिंह लाठी (संयुक्त कर्मचारी संघ)
  • विनोद संधु (इंटक उपप्रधान)
  • राजबीर (सदस्य, करनाल यूनिट)

ये हैं कर्मचारियों की 12 प्रमुख मांगें

1. 362 मार्गों पर प्राइवेट बस परमिट रद्द हों

सात मार्च को जारी अधिसूचना के तहत राज्य सरकार ने 362 मार्गों पर 3658 निजी बसों को परमिट देने की योजना बनाई है। यूनियन की मांग है कि इस योजना को रद्द किया जाए और प्रदेश की जनसंख्या के अनुपात में सरकारी बसों का बेड़ा बढ़ाया जाए।

2. किलोमीटर स्कीम और ठेका पॉलिसी पर रोक लगे

कर्मचारियों की मांग है कि किलोमीटर स्कीम और ठेका आधार वाली नीति को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए क्योंकि इससे स्थाई रोजगार और गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ा है।

3. इलेक्ट्रॉनिक बसों को रोडवेज बेड़े में शामिल किया जाए

सरकार को चाहिए कि वो पर्यावरण के हित में इलेक्ट्रॉनिक बसों को रोडवेज बेड़े में शामिल करे, जिससे रोजगार भी बढ़ेगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी।

4. निजीकरण की नीतियों पर रोक

कर्मचारी संघ ने साफ शब्दों में कहा कि रोडवेज का निजीकरण किसी भी हाल में मंजूर नहीं है। सरकारी ढांचे को मजबूत किया जाए।

वेतन और सेवा शर्तों में सुधार की मांग

5. वेतन विसंगतियों को दूर कर ग्रेड पे बढ़ाई जाए

परिचालक, चालक और लिपिकों के वेतनमानों में व्याप्त विसंगतियों को दूर किया जाए और उनके अनुभव, योग्यता व कार्यभार के अनुसार ग्रेड पे को बढ़ाया जाए।

6. ड्यूटी घंटे तय हों और ओवरटाइम का भुगतान हो

चालकों और परिचालकों से केवल 8 घंटे की ड्यूटी ली जाए। इसके अतिरिक्त की ड्यूटी पर उचित ओवरटाइम दिया जाए।

7. रात्रि ठहराव का भुगतान हो

रात्रि में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के ठहराव का भुगतान महाप्रबंधक स्तर पर अनुमोदित किया जाए।

अवकाश और स्थायीत्व से जुड़ी मांगें

8. अर्जित अवकाश कटौती के आदेश वापस हों

निरीक्षक, उप निरीक्षक, चालक, परिचालक और वर्कशॉप कर्मियों के अर्जित अवकाश की कटौती के आदेश तुरंत प्रभाव से रद्द किए जाएं।

9. सिविल सर्विस रूल्स के तहत सभी प्रकार की छुट्टियां दी जाएं

सभी कर्मचारियों को सिविल सर्विस रूल्स के अनुसार मेडिकल, कैजुअल, अर्जित और विशेष छुट्टियां मिलनी चाहिए।

10. 2002 से 2016 तक के अस्थायी कर्मचारियों को पक्का किया जाए

  • 2002 में भर्ती चालकों को नियुक्ति तिथि से पक्का कर पुरानी पेंशन योजना में शामिल किया जाए।
  • 1992 से 2004 तक भर्ती कर्मचारियों को भी नियुक्ति तिथि से स्थायी मानते हुए लाभ दिए जाएं।
  • 2016 में प्रक्रिया पूरी कर भर्ती किए गए चालकों को भी पक्का किया जाए।
  • दादरी डिपो के 52 हेल्परों को पॉलिसी बनाकर स्थायी किया जाए।

अन्य विशेष मांगें

11. बोनस और GIS की कटौती में सुधार

कर्मचारियों और अधिकारियों को एक माह के वेतन के बराबर बोनस दिया जाए। GIS की कटौती ₹30 से बढ़ाकर ₹100 प्रति माह की जाए ताकि सेवानिवृत्त जीवन सुरक्षित हो।

12. सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पहचान पत्र और सुविधाएं मिलें

NPS और एक्सग्रेसिया स्कीम के तहत भर्ती कर्मचारियों को सेवानिवृत्त होने के बाद पहचान पत्र दिए जाएं। वहीं, GPF योजना के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पहचान पत्रों से “No Free Travelling” शब्द हटाए जाएं।

अम्बाला डिपो के राजबीर की हत्या का मामला भी उठा

संघ ने अम्बाला डिपो के चालक राजबीर की हत्या को लेकर भी पुरानी मांगों को दोहराया। पूर्व परिवहन मंत्री से हुए समझौते के अनुसार मृतक परिवार को एक सदस्य की सरकारी नौकरी और ₹10 लाख की आर्थिक सहायता अब तक नहीं दी गई है। संघ ने चेताया कि अगर इस पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और उग्र हो सकता है।

क्या होगा इस हरियाणा रोडवेज हड़ताल 9 जुलाई का असर?

हरियाणा रोडवेज में प्रतिदिन लाखों लोग यात्रा करते हैं। 9 जुलाई को बसों का बंद रहना यात्रियों की परेशानी बढ़ा सकता है। छात्र, नौकरीपेशा, वृद्ध और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इससे सीधे प्रभावित होंगे।

सरकार की चुप्पी या रणनीति?

अब तक सरकार की तरफ से इस ऐलान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह चुप्पी कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा करती है कि या तो सरकार इसे हल्के में ले रही है या फिर कोई रणनीति बना रही है। लेकिन यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो यह हड़ताल बड़े स्तर पर जनजीवन को बाधित कर सकती है।

क्या कहता है यूनियन का भविष्य का रोडमैप?

संघ ने साफ कहा है कि अगर 9 जुलाई के बाद भी सरकार ने मांगों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जा सकता है। कर्मचारियों ने जिला स्तर पर भी प्रदर्शन और रैलियों की तैयारी शुरू कर दी है।

निष्कर्ष:

हरियाणा रोडवेज हड़ताल 9 जुलाई केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, यह कर्मचारियों के भरोसे, अधिकार और भविष्य से जुड़ा सवाल है। अगर सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो यह हड़ताल राज्य के परिवहन ढांचे को प्रभावित करने के साथ-साथ राजनीतिक हलचलों को भी जन्म दे सकती है।

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