जिला अदालत ने सुनाया सजा का फैसला, जुर्माने के साथ दंड
करनाल, 12 फरवरी 2025 – नशे के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियान के तहत करनाल जिला अदालत ने दो नशा तस्करों को पांच-पांच साल की सजा और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रजनीश कुमार शर्मा की अदालत ने सुनाया। आरोपियों के पास से एक किलो 100 ग्राम अफीम बरामद हुई थी, जो अवैध रूप से उनके पास मौजूद थी।
घटना का विस्तार और गिरफ्तारी
यह मामला 6 दिसंबर 2019 का है, जब पुलिस को सूचना मिली कि कुछ नशा तस्कर सेक्टर 12 स्थित निर्मल कुटिया के पास नशे का सामान लेकर आ रहे हैं। पुलिस की सीआईए वन टीम ने सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने तस्करों के पास एक बैग में 1 किलो 100 ग्राम अफीम बरामद की।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी सुखविंद्र सिंह उर्फ सुखा और गंगाराम ने शुरू में अफीम के साथ पकड़ाए जाने की बात से इंकार किया था, लेकिन पुलिस की सख्ती और जांच में उनकी पहचान साफ हो गई। दोनों आरोपियों का संबंध उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से था। सुखविंद्र सिंह यूपी के रामपुर जिले के किरमचा डेरा बगीया गांव का निवासी था, जबकि गंगाराम यूपी के रहपुरा गांव का रहने वाला था।
प्रारंभिक जांच और कार्रवाई
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उनके खिलाफ सिविल लाइन थाना में मामला दर्ज किया। मामले की जांच को लेकर पुलिस ने पुख्ता सबूत जुटाने के लिए विभिन्न कदम उठाए। दोनों आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि और नशे के कारोबार में उनकी संलिप्तता को लेकर पुलिस ने गहन जांच की। इस दौरान दोनों आरोपियों से मिली जानकारी ने पुलिस को कई अहम सुराग दिए।
अदालत का फैसला
चार साल तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद अब जिला अदालत ने दोनों आरोपियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई। अदालत ने साथ ही 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने यह फैसला सख्त संदेश देने के लिए सुनाया है, ताकि नशे के कारोबार में संलिप्त लोग ऐसा अपराध करने से पहले हजार बार सोचें।
अदालत ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और उसके बाद ही यह सजा सुनाई। यह फैसला न केवल करनाल बल्कि पूरे प्रदेश में नशे के खिलाफ की जा रही कानूनी कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।
नशा तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
करनाल जिले में पुलिस और जिला प्रशासन ने नशे के तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि पुलिस प्रशासन न केवल बड़े तस्करों बल्कि छोटे स्तर पर काम करने वालों के खिलाफ भी सख्त है। जिले के विभिन्न इलाकों में नशे के कारोबार पर नियंत्रण पाने के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं, और इस तरह के मामलों में त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
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जिला न्यायवादी का बयान
इस मामले में जिला न्यायवादी डॉ. पंकज सैनी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में एक सशक्त संदेश भेजता है कि नशे के तस्करों को कोई बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अदालत के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा की गई कड़ी मेहनत और जांच की बदौलत यह सजा मिल पाई है।
सहायक न्यायवादी की मेहनत
सहायक न्यायवादी निखिल कुमार ने इस मामले में बहुत मेहनत की। उन्होंने अभियोजन पक्ष का पक्ष मजबूती से रखा और आरोपियों को सजा दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका कहना था कि नशे के तस्करों को सजा दिलवाना एक संघर्ष था, लेकिन अदालत के फैसले से न्याय की जीत हुई है।
नशे के खिलाफ प्रशासन की लगातार जंग
कर्नल प्रशासन द्वारा नशे के खिलाफ चलाए गए अभियान का यह हिस्सा है। पुलिस ने न केवल इस मामले में सफलता पाई, बल्कि पहले भी ऐसे कई मामलों में बड़ी सफलता प्राप्त की है। यह इस बात का संकेत है कि प्रशासन नशे के कारोबार को लेकर कितना गंभीर है। पुलिस अब हर स्तर पर इस पर लगाम लगाने के लिए प्रतिबद्ध है।
नशे की बढ़ती तस्करी: एक राष्ट्रीय समस्या
भारत में नशे के कारोबार और तस्करी की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। हरियाणा जैसे राज्य जहां नशे की तस्करी तेजी से फैल रही है, वहां पुलिस और प्रशासन ने इस पर काबू पाने के लिए कई नए तरीके अपनाए हैं। राज्य सरकार द्वारा नशे के खिलाफ कई अभियान चलाए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि तस्करी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और नशे के कारोबार पर नियंत्रण पाया जाए।
आखिरकार, समाज में बदलाव की उम्मीद
नशे के तस्करों के खिलाफ यह कठोर फैसला समाज में बदलाव की उम्मीद जगा रहा है। ऐसे फैसले केवल न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश भी देते हैं कि अपराध चाहे जितना बड़ा हो, न्याय एक दिन अपनी जगह बनाता है। इस फैसले से उन लोगों को भी डर होगा, जो नशे के कारोबार में शामिल हैं।
करनाल में इस तरह के मामले अब पहले से ज्यादा ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। यह पूरा मामला, और इस मामले में मिली सफलता, न केवल पुलिस और अदालत की मेहनत का परिणाम है, बल्कि समाज के लिए भी एक जागरूकता का संदेश है।
