कुरुक्षेत्र के पशु मेले में धर्मेंद्र का जलवा
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित पशु मेले में इस बार हिसार जिले के बास बादशाहपुर गांव से आए मुर्राह नस्ल के भैंसे ‘धर्मेंद्र’ ने सबका ध्यान खींच लिया। साढ़े चार साल का यह भैंसा अपनी खासियतों और अनोखी खुराक के लिए मेले का मुख्य आकर्षण बन गया है।
धर्मेंद्र का कद 5.5 फीट है, और इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। धर्मेंद्र की खास देखभाल और शानदार खुराक का श्रेय इसके मालिक धर्मवीर और कुलदीप को जाता है, जो इसे अपने परिवार के सदस्य की तरह पालते हैं।
युवराज का बेटा, धर्मेंद्र बना आकर्षण का केंद्र
धर्मेंद्र की कहानी खास इसलिए है क्योंकि यह पहले से ही चर्चित रहे भैंसे ‘युवराज’ का बेटा है। युवराज ने भी कई पशु मेलों में अपनी छाप छोड़ी थी। अब धर्मेंद्र उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। इसकी कीमत 50 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है, लेकिन धर्मेंद्र के मालिक इसे 1 करोड़ रुपये से कम में बेचने के लिए तैयार नहीं हैं।
धर्मेंद्र ने इससे पहले महेंद्रगढ़ के पाली और राजस्थान के पुष्कर मेले में भी धूम मचाई थी। धर्मवीर का कहना है कि अगली योजना पंजाब में लगने वाले पशु मेले में इसे ले जाने की है।
खास खुराक और फिटनेस का राज
धर्मेंद्र की डाइट हर किसी को हैरान कर देती है। इसे हर दिन 5 लीटर दूध, 5 किलोग्राम दही, और 5 से 10 किलोग्राम गाजर, सेब और केले दिए जाते हैं। इसके अलावा, चना, मक्का, मेथी और जौं भी इसकी खुराक में शामिल हैं। धर्मेंद्र की फिटनेस के लिए इसे रोजाना 5 किलोमीटर तक सैर कराई जाती है।
धर्मवीर बताते हैं कि धर्मेंद्र को खास चारे के साथ पोषण से भरपूर आहार दिया जाता है ताकि इसकी ताकत और स्वास्थ्य हमेशा अच्छा रहे। यह न केवल प्रतियोगिताओं के लिए तैयार रहता है, बल्कि नस्ल सुधार के लिए भी उपयोगी साबित हो रहा है।
प्रतियोगिताओं में दिखा दमखम
धर्मेंद्र न केवल अपनी खुराक और कद-काठी के लिए मशहूर है, बल्कि यह कई प्रतियोगिताओं में भी जीत दर्ज कर चुका है। कुरुक्षेत्र के केशव पार्क में आयोजित मेले में यह मुख्य प्रतियोगिता में भाग लेने वाला है। इस मेले में हरियाणा और अन्य राज्यों से आए करीब 600 पशु शामिल हुए हैं।
मेला आयोजक हरियाणा डेयरी फार्मिंग एसोसिएशन के प्रधान पौरूष महला ने बताया कि इस बार पशुपालकों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। प्रतियोगिताओं के लिए अलग से रिंग बनाए गए हैं, जहां धर्मेंद्र जैसे भैंसे अपना हुनर दिखा रहे हैं।
पशुपालन का जुनून और संभावनाएं
धर्मवीर और कुलदीप का पशुपालन के प्रति जुनून इस मेले में साफ झलकता है। धर्मवीर बताते हैं कि वह पेशे से जमींदार हैं और उन्हें शुरू से ही पशु रखने का शौक है। उनके पास मुर्राह नस्ल की अन्य भैंसे भी हैं, जिन्हें वह अलग-अलग पशु मेलों में लेकर जाते हैं।
उनका मानना है कि यदि पशुओं की सही देखभाल की जाए, तो यह आमदनी का बड़ा स्रोत बन सकते हैं। उनके मुताबिक, धर्मेंद्र के सीमन के लिए भी किसानों की भारी मांग है, ताकि नस्ल सुधार के माध्यम से पशुधन को और बेहतर बनाया जा सके।
पशु मेले में जुटे 600 से अधिक पशु
कुरुक्षेत्र के पशु मेले में गाय, भैंस, कटड़े और कटड़ियों सहित 600 से अधिक पशु पहुंचे हैं। यह मेला शुक्रवार से शुरू हुआ और रविवार को समाप्त होगा। मेले में हरियाणा के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी पशुपालक और किसान पहुंचे हैं।
पौरूष महला ने बताया कि इस तरह के मेलों का उद्देश्य पशुपालकों को एक मंच देना है, जहां वे अपने पशुओं की नस्ल, खुराक और देखभाल के अनुभव साझा कर सकें।
धर्मेंद्र की कीमत और भविष्य
मेले में धर्मेंद्र की कीमत 50 लाख रुपये तक लग चुकी है, लेकिन धर्मवीर इसे 1 करोड़ रुपये में बेचने का मन बना चुके हैं। उनका कहना है कि वह धर्मेंद्र को सिर्फ सही और इच्छुक खरीदार को ही बेचेंगे, जो इसके महत्व को समझ सके।
धर्मेंद्र की लोकप्रियता और इसकी कीमत न केवल इसके मालिक के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह हरियाणा में पशुधन की गुणवत्ता और संभावनाओं को भी दर्शाती है।
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निष्कर्ष: पशुधन की अहमियत और संभावना
धर्मेंद्र जैसे पशु भारत में पशुपालन के महत्व और इसकी आर्थिक संभावनाओं को रेखांकित करते हैं। सही देखभाल और खुराक के साथ, पशुपालन न केवल एक शौक है, बल्कि यह किसानों के लिए आमदनी का प्रमुख स्रोत भी बन सकता है। कुरुक्षेत्र के इस मेले में धर्मेंद्र जैसे भैंसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मेहनत और जुनून से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
