दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक और बड़ा झटका मिला है। केजरीवाल के निजी सचिव (PA) बिभव कुमार को अब टर्मिनेट कर दिया गया है। इससे पहले, ईडी ने शराब घोटाले के मामले में उनसे पूछताछ की थी। उन्हें इस आधार पर टर्मिनेट कर दिया गया है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए झटके का सिलसिला जारी है। विजिलेंस डिपार्टमेंट ने सीएम के निजी सचिव (PA) बिभव कुमार को टर्मिनेट कर दिया है। इसके साथ ही बताया जा रहा है कि शराब घोटाले के मामले में ED ने विभव कुमार से कई बार पूछताछ की है।
शराब घोटाले में जेल में बंद अरविंद केजरीवाल के लिए न्यायिक झटके एक के बाद एक आ रहे हैं। मंगलवार को हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को सही ठहराया था, लेकिन बुधवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्हें हफ्ते में पांच बार वकील से मिलने की इजाजत थी।
राजनीतिक उठापटक का असर: अरविंद केजरीवाल के मंत्री ने दिया इस्तीफा
अरविंद केजरीवाल के गिरफ्तारी मामले में सुप्रीम कोर्ट की त्वरित सुनवाई का इंतजार करते हुए भी उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा, क्योंकि वहां भी कोई विशेष बेंच तय नहीं हुई थी। इसी दौरान, उनकी सरकार के मंत्री राजकुमार आनंद ने अपने ही मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार मामले में विश्वास खोकर इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, उनके निजी सचिव बिभव कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
इस्तीफा देते समय मंत्री का बयान: केजरीवाल सरकार में भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं
- राजकुमार आनंद ने इस्तीफा देते समय कहा,’राजनीति में आने का मकसद था देश को बदलना, लेकिन आज यहां खड़े होकर अफसोस है कि राजनीति तो नहीं बदली, लेकिन राजनेता बदल गए हैं।’
- आम आदमी पार्टी का उद्गम भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ा गया था, लेकिन आज यह पार्टी खुद भ्रष्टाचार के चक्र में फंस गई है। मंत्री पद पर काम करना अब असंभव हो गया है। मैं पार्टी, सरकार, और मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूँ।
- मैं भ्रष्टाचार में शामिल होकर अपने नाम को कभी नहीं जुड़ना चाहता। मुझे लगता है कि हमारे पास अब शासन करने की नैतिक शक्ति बची नहीं है।
- पहले लग रहा था कि हमें फंसाया जा रहा है, लेकिन जब हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया, तो हमें यह एहसास हुआ कि हमारे यहां कुछ गड़बड़ है।
मंत्रिमंडल में उतार-चढ़ाव: दिल्ली सरकार के 6 मंत्रियों में से केवल 5 बचे
केजरीवाल सरकार के 6 मंत्रियों में से एक, राजकुमार आनंद ने अपने इस्तीफे में पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया, जिसमें गोपाल राय, इमरान हुसैन, कैलाश गहलोत, सौरभ भारद्वाज, और आतिशी भी शामिल थे। राजकुमार आनंद ने भ्रष्टाचार के रूप को देखकर अपना फैसला किया, जो पार्टी के नेतृत्व को भी चिंतित कर गया है।
क्या है दिल्ली की नई शराब नीति?
22 मार्च 2021 को मनीष सिसोदिया ने नई शराब नीति का ऐलान किया था। इस नीति को लागू करने के लिए 17 नवंबर 2021 को एक्साइज पॉलिसी 2021-22 को प्रभाव से लागू कर दिया गया। नई शराब नीति के बाद, सरकार ने शराब व्यापार से खुद को दूर किया और सभी शराब की दुकानों को निजी स्वामित्व में जाने की अनुमति दी। इसका मकसद माफिया राज को समाप्त करना और सरकारी आय में वृद्धि करना था। हालांकि, नई नीति विवादों में फंस गई और 28 जुलाई 2022 को सरकार ने नई शराब नीति को रद्द कर पुरानी पॉलिसी को पुनः लागू कर दिया।
