निजी स्कूल फीस वृद्धि करनाल: बिना Form-6 20% तक बढ़ी फीस, अभिभावकों में गुस्सा

निजी स्कूल फीस वृद्धि करनाल: बिना Form-6 20% तक बढ़ी फीस, अभिभावकों में गुस्सा
Spread the love

बिना नियम, बिना अनुमति… करनाल के निजी स्कूलों ने फीस बढ़ाई! क्या आपके बच्चे का स्कूल भी ऐसा कर रहा है? जानिए पूरी सच्चाई और नियम।

करनाल। निजी स्कूल फीस वृद्धि करनाल का मुद्दा इन दिनों जिले में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कई निजी स्कूलों द्वारा निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए 15 से 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी गई है, जिससे अभिभावकों पर अचानक आर्थिक बोझ बढ़ गया है। शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकांश स्कूलों ने फीस बढ़ाने से पहले अनिवार्य फार्म-6 तक नहीं भरा, जो कि नियमों का सीधा उल्लंघन है।

जिले के विभिन्न क्षेत्रों से मिल रही शिकायतों के अनुसार, निजी स्कूलों ने बिना किसी पूर्व सूचना के अभिभावकों को बढ़ी हुई फीस के नोटिस थमा दिए हैं। कई मामलों में तो स्कूल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि अभिभावक समय पर फीस जमा नहीं करते हैं, तो बच्चों को परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा या उनका नाम स्कूल से काट दिया जाएगा। इस प्रकार की सख्ती ने अभिभावकों को मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से परेशान कर दिया है।

अभिभावकों पर बढ़ता आर्थिक दबाव

महंगाई के इस दौर में पहले से ही घरेलू खर्चों से जूझ रहे अभिभावकों के लिए अचानक 20 प्रतिशत तक की स्कूल फीस वृद्धि किसी बड़े झटके से कम नहीं है। कई अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों ने फीस बढ़ाने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया और न ही कोई पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई।

एक अभिभावक ने बताया, “हमें एक नोटिस थमा दिया गया जिसमें सीधे फीस बढ़ा दी गई थी। न कोई मीटिंग हुई, न कोई चर्चा। अगर हम विरोध करते हैं तो बच्चों के भविष्य की चिंता दिखाकर दबाव बनाया जाता है।”

नियम क्या कहते हैं?

हरियाणा शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी निजी स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले फार्म-6 भरकर विभाग को सूचित करना अनिवार्य है। इस फार्म में स्कूल को अपनी आय, खर्च, वेतन और अन्य वित्तीय विवरण देने होते हैं, ताकि स्कूल फीस वृद्धि का औचित्य जांचा जा सके।

इसके अलावा, सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स के अध्यक्ष डॉ. राजन लांबा के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल अपने वर्तमान विद्यार्थियों की फीस में 7.41 प्रतिशत से अधिक वृद्धि नहीं कर सकता। यह सीमा शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित की गई है, ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।

नियमों की अनदेखी क्यों?

विशेषज्ञों का मानना है कि कई निजी स्कूल शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय के रूप में देखने लगे हैं। यही कारण है कि वे नियमों को नजरअंदाज कर मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं।

हालांकि कुछ स्कूलों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, शिक्षकों के वेतन और अन्य संचालन खर्चों के कारण फीस बढ़ाना जरूरी हो गया है, लेकिन इसके लिए भी नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

ऑनलाइन प्रक्रिया: फिर भी नहीं भरा फार्म-6

शिक्षा विभाग ने फार्म-6 भरने की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। स्कूलों को विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर लिंक के माध्यम से फार्म डाउनलोड कर भरना होता है।

इसके लिए उन्हें अपने पुराने एमआईएस यूजरनेम और पासवर्ड का उपयोग करना होता है। यदि किसी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है, तो विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 और ईमेल form6ps2026@gmail.com भी जारी किया है।

इसके बावजूद कई स्कूलों ने इस प्रक्रिया को नजरअंदाज किया और सीधे फीस बढ़ा दी।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जो बिना फार्म-6 भरे फीस बढ़ा रहे हैं।

उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और बढ़ सकती है और अन्य स्कूल भी इसी रास्ते पर चल पड़ेंगे।

क्या बोले अधिकारी?

जिला शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा ने स्पष्ट कहा है कि फार्म-6 भरना सभी निजी स्कूलों के लिए अनिवार्य है। यदि कोई स्कूल बिना अनुमति फीस बढ़ाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे ऐसे मामलों की शिकायत विभाग को दें, ताकि जांच कर उचित कदम उठाए जा सकें।

फीस स्ट्रक्चर को लेकर नियम

फार्म-6 के अनुसार, स्कूल केवल निम्नलिखित फीस ही ले सकते हैं:

  • पंजीकरण शुल्क
  • दाखिला शुल्क (पहली, छठी, नौवीं और 11वीं कक्षा)
  • बोर्ड परीक्षा शुल्क
  • घोषित समग्र फीस

इसके अलावा, परिवहन, हॉस्टल, भोजन और टूर जैसी सुविधाओं के लिए फीस केवल उन्हीं छात्रों से ली जा सकती है, जो इन सेवाओं का उपयोग करते हैं।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फीस वृद्धि को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। इससे शिक्षा आम लोगों की पहुंच से बाहर हो सकती है।

करनाल में बढ़ता असंतोष

इस मुद्दे को लेकर करनाल में अभिभावकों के बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है। कई जगहों पर अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ विरोध भी जताया है।

निष्कर्ष

यह मामला केवल स्कूल फीस वृद्धि का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर आने वाले समय में और गंभीर हो सकता है।

ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और शिक्षा से जुड़ी बड़ी खबरों के लिए विजिट करें: 9PM News Channel

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *