न्यायालय परिसर: 150 में से 112 अवैध खोखे हटाए, प्रशासन की बड़ी कार्यवाही

न्यायालय परिसर: 150 में से 112 अवैध खोखे हटाए, प्रशासन की बड़ी कार्यवाही
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सोनीपत: न्यायालय परिसर से अवैध खोखे हटाने की कार्यवाही – प्रशासन का सख्त रूख

सोनीपत में न्यायालय परिसर और लघु सचिवालय के आसपास अवैध रूप से स्थापित खोखों पर प्रशासन ने अपनी सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। एसडीएम अमित कुमार और तहसीलदार समेत लोक निर्माण विभाग व नगर निगम के अधिकारी 1 जनवरी को मौके पर पहुंचे, जहां उन्होंने अवैध खोखों को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी। इस अभियान से न्यायालय क्षेत्र को व्यवस्थित और व्यवधान रहित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

अवैध खोखों पर न्यायालय के आदेश के बाद हुई कार्यवाही तेज

12 दिसंबर 2024 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आदेश पर लोक निर्माण विभाग ने अदालत व लघु सचिवालय परिसर में 24 खोखों को नोटिस जारी किया था। इनमें से 15 खोखों को पहले ही हटा दिया गया था, जबकि 9 खोखे अभी भी अपनी जगह पर बने हुए थे। यह सभी खोखे लघु सचिवालय परिसर में लॉकअप कक्ष की चहारदीवारी निर्माण के कार्य में बाधा बने हुए थे। चहारदीवारी निर्माण के लिए 4 दिसंबर को ठेका आवंटित किया गया था, लेकिन कार्य की प्रगति अवैध खोखों के कारण रुक गई थी।

वसीका नवीसों और स्टांप विक्रेताओं की बढ़ती समस्या

न्यायालय परिसर में बिना लाइसेंस संचालित खोखों से लंबे समय से वैध वसीका नवीस और स्टांप विक्रेता परेशान थे। इन विक्रेताओं ने उपायुक्त को ज्ञापन देकर अवैध खोखा संचालकों पर कार्रवाई की मांग की थी। उनका दावा था कि सोनीपत तहसील में केवल 12 वसीका नवीस और 26 स्टांप विक्रेताओं को ही वैध लाइसेंस दिया गया है, जबकि परिसर में 150 से अधिक खोखे लगे हुए हैं।

इस ज्ञापन में साफतौर पर कहा गया कि इनमें से केवल 38 खोखे ही वैध हैं। बाकी सभी खोखे अवैध तरीके से संचालित हो रहे थे और वैध लाइसेंसधारी विक्रेताओं के व्यवसाय में रुकावट डाल रहे थे। उन्होंने प्रशासन से यह मांग की कि वैध खोखों के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित किया जाए।

उपायुक्त ने दिए स्पष्ट निर्देश

30 दिसंबर 2024 को वसीका नवीसों और स्टांप विक्रेताओं ने दोबारा उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार को शिकायत सौंपी। उपायुक्त ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार केवल लाइसेंसधारी वसीका नवीस, स्टांप वेंडर और अन्य अधिकृत व्यक्तियों को ही परिसर में कार्य करने की अनुमति दी जाएगी। उपायुक्त ने कहा कि “अवैध खोखे हटाना न केवल आवश्यक है, बल्कि उच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान भी है।”

अधिकारियों की उपस्थिति में हटे कई खोखे

न्यायालय परिसर में प्रशासन की सख्ती देखकर कई खोखा संचालकों ने खुद ही अपने खोखों को हटाना शुरू कर दिया। इस प्रक्रिया में एसडीएम अमित कुमार, तहसीलदार और लोक निर्माण विभाग के उपमंडल अभियंता रविन दत्ता मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी खोखों के लाइसेंस की जांच की जाएगी और जो अवैध पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत हटाया जाएगा।

वैध व्यवसाय को मिलेगा प्रोत्साहन

इस कार्यवाही का उद्देश्य न केवल अवैध कब्जों को हटाना है, बल्कि वैध रूप से व्यवसाय कर रहे व्यक्तियों को उचित स्थान और वातावरण प्रदान करना भी है। अधिकारियों ने कहा कि “इस कार्रवाई से यह सुनिश्चित होगा कि लाइसेंसधारी विक्रेता बिना किसी बाधा के अपना कार्य कर सकें।”

सकारात्मक कदम या चुनौतीपूर्ण कार्यवाही?

यह कार्यवाही कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। जहां एक ओर यह न्यायालय परिसर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने की पहल है, वहीं दूसरी ओर उन व्यक्तियों के लिए एक चुनौती है, जिन्होंने बिना लाइसेंस के अपना व्यवसाय स्थापित किया हुआ था।

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भविष्य की दिशा

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस तरह की कार्यवाही नियमित रूप से जारी रहेगी। उपायुक्त और संबंधित अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ प्रशासन सख्ती से पेश आएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि न्यायालय परिसर में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही काम करने की अनुमति हो।

निष्कर्ष: जटिल के खिलाफ़ के लिए प्रशासन की कटीनी छांँी

सोनीपत न्यायालय परिसर में अवैध खोखों को हटाने की कार्यवाही कानून और व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह कार्रवाई दर्शाती है कि प्रशासन उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए क्षेत्र को व्यवस्थित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, यह उन लोगों के लिए एक संदेश भी है जो बिना अनुमति के इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त हैं कि प्रशासन की नजर से कोई बच नहीं सकता।

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